

Bhandara Municipal Council: स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर को सुंदर, स्वच्छ और कचरा-मुक्त बनाने के नगर परिषद के तमाम दावे धरातल पर पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि भंडारा शहर की सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन बीते तीन वर्षों से प्रशासनिक ढिलाई और वित्तीय तंगी का शिकार बना हुआ है। पुराने ठेकेदार की ओर से काम बंद कर दिए जाने और नई निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के अधर में लटके होने से शहर में गंदगी और कचरे का साम्राज्य फैलने की आशंका बढ़ गई है।
वित्तीय संकट के कारण अटका नया टेंडर नगर परिषद की ओर से शहर की सफाई और घर-घर से कचरा संकलन का कार्य ठेके पर दिया जाता है। वर्ष 2021-22 में चंद्रपुर जिले के बल्लारशाह स्थित एक निजी एजेंसी को लगभग 2.45 करोड़ रुपये की लागत से सफाई का टेंडर दिया गया था। इस ठेके की आधिकारिक समयावधि वर्ष 2023 में ही समाप्त हो चुकी है। नियमानुसार अवधि समाप्त होते ही नया टेंडर जारी किया जाना चाहिए था, लेकिन भंडारा नगर परिषद की दयनीय वित्तीय स्थिति के कारण नई निविदा प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं की जा सकी।
नया टेंडर न होने के कारण नगर परिषद प्रशासन की ओर से पुराने ठेकेदार से ही मिन्नतें और अनुरोध कर सफाई कार्य को घसीटा जा रहा था। ठेकेदार न चाहते हुए भी पिछले तीन वर्षों से अतिरिक्त समय सीमा में सफाई व्यवस्था का बोझ उठा रहा था। हालांकि, बकाया भुगतान और अनिश्चितता से परेशान होकर आखिरकार ठेकेदार ने 16 सितंबर से कचरा संकलन और सफाई का काम पूरी तरह से बंद कर दिया। ठेकेदार के इस कदम से नगर परिषद में हड़कंप मच गया।
सफाई व्यवस्था को स्थायी रूप से पटरी पर लाने के लिए नगर परिषद की ओर से इससे पहले दो बार टेंडर निकाले गए थे, लेकिन तकनीकी खामियों और प्रशासनिक अड़चनों के कारण वे अंतिम चरण तक नहीं पहुंच सके। अब प्रशासन की ओर से तीसरी बार निविदा प्रक्रिया शुरू की जा रही है। नागरिकों का कहना है कि यदि इस बार भी टेंडर प्रक्रिया सफल नहीं हुई, तो आने वाले समय में शहरवासियों को भारी गंदगी और बदबू का सामना करना पड़ेगा। अब देखना यह है कि तीसरी बार निकाली गई यह निविदा सफल हो पाती है या शहर की सफाई व्यवस्था यूं ही चरमराई रहेगी।
ठेकेदार की ओर से काम छोड़ दिए जाने के बाद शहर में उपजे संकट से निपटने के लिए नगर परिषद ने आनन-फानन में लेबर कॉन्ट्रैक्ट (श्रम अनुबंध) के आधार पर वैकल्पिक व्यवस्था बनाई। इसके तहत 55 नए कर्मचारियों को सफाई व्यवस्था में लगाया गया है, जिनमें से 38 कर्मचारियों को घंटा गाड़ियों के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संकलन के काम में तैनात किया गया है। लेकिन इस तात्कालिक व्यवस्था ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। पिछले कई सालों से सेवाएं दे रहे पुराने कर्मचारियों को हटाकर नए लोगों को काम पर रखे जाने से पुराने कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त हो गया है। विरोध स्वरूप पुराने कर्मचारियों ने नगर परिषद के खिलाफ हड़ताल शुरू कर दी है।