ब्रम्हपुरी रेलवे स्टेशन (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Chandrapur District Bifurcation: चंद्रपुर ज़िले को बांटकर नया ज़िला बनाने का विषय पिछले कई दशकों से चर्चा में है। हालांकि महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित ज़िलों की सूची में चिमूर का नाम सुर्खियों में है, लेकिन यह साफ़ है कि भौगोलिक, प्रशासकीय, शैक्षणिक और संवाद के सभी पैमानों पर ‘ब्रह्मपुरी ज़िला ‘ बनाने के लिए सबसे सही विकल्प है।
इसे केवल एक भावनात्मक मांग के तौर पर ना देखते हुए तकनीकी व आर्थिक नजरिए से देखने की मांग डॉ. बालकृष्ण शेलके ने की है। प्रशासकीय व भौगोलिक दृष्टि से ब्रह्मपुरी शहर चंद्रपुर, गड़चिरोली, नागपुर, गोंदिया, भंडारा इन पांच ज़िलों की सीमाओं के पास बसा एक मध्य स्थान है। नजदिकी तीनों तहसील के लोगों के लिए यह बहुत पास और सुविधापूर्ण जगह है।
चिमूर जिला मुख्यालय करना तीनों तहसीलों के लिए लंबी दूरी के कारण असुविधापूर्ण ही होगा। जिला मुख्यालय के लिए सड़कें व व्याप्त परिसर अहम होता है। इस दृष्टि से आधारभूत संरचना में ब्रह्मपुरी सर्वसमावेशक है। यहां शिक्षा व स्वास्थ्य की सुविधाएं पहले से ही बेहतरीन रही है। जिला मुख्यालय का निर्माण यहां कम खर्च में अधिक कारगर हो सकता है।
ब्रह्मपुरी जिला बनाने के लिए सिर्फ़ इच्छाशक्ति का होना पर्याप्त नहीं बल्कि शासन प्रशासन पर दबाव लाना होगा, ऐसा अब लोग मानने लगे है। इसके तहत पत्र मुहिम, जन आंदोलन, लोगों के ज्ञापनों व्दारा मांग व लगातार व्यापक समर्थन इसके माध्यम से विधानसभा व लोकसभा में ताकत के साथ जनप्रतिनिधि मांग को आगे बढा सके, इसलिए सार्थक प्रयास करने होंगे, ऐसी जनभावना है।
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‘ब्रह्मपुरी ज़िला’ बनाने को लेकर अब तक आंदोलन हुए है। नेताओं व मंत्रियों से आश्वासन भी मिले है। परंतु बात इससे आगे नहीं बढ पाई है। 80 के दशक में चंद्रपुर जिले का विभाजन होकर गड़चिरोली का निर्माण हुआ था। ब्रम्हपुरी का भी विभाजन होकर एक तहसील का निर्माण किया गया है। ऐसे में ब्रम्हपुरी पर लगातार अन्याय होता आ रहा है। ऐसे में अब कडा रुख लेकर चरणबध्द रुप से आंदोलन की जरुरत डॉ। बालकृष्ण शेलके ने जताई है।