चंद्रपुर में शिवाजी महाराज के विचारों पर मंथन, छत्रपति लोककल्याणकारी शासन के आदर्श: किशोर जामदार
Chandrapur Awareness Program News: चंद्रपुर में आयोजित ‘शिवाजी कौन था’ जनजागृति कार्यक्रम में वक्ताओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज को लोककल्याणकारी शासन व्यवस्था का प्रतीक बताया।
Chhatrapati Shivaji Maharaj (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Chandrapur Welfare Governance News: राजा छत्रपति शिवाजी महाराज मुस्लिम विरोध के प्रतीक नहीं थे, बल्कि लोककल्याणकारी शासन व्यवस्था के आदर्श थे, ऐसा प्रतिपादन किशोर जामदार ने किया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, चंद्रपुर की ओर से शनिवार को आयोजित शिवाजी कौन था पुस्तक जनजागृति कार्यक्रम में वे मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में प्रस्तुत राजनीतिक विचारों से भयभीत तथा मुस्लिम विरोधी राजनीति करने वाले लोग पुस्तक के खिलाफ निम्नस्तरीय राजनीति कर रहे हैं।
लेखक की हत्या के बाद भी इन विचारों को दबाने का प्रयास जारी रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रकाशक प्रशांत अंबी के खिलाफ की गई अभद्र भाषा केवल व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शिवाजी महाराज के लोककल्याणकारी विचारों के प्रति नाराजगी का प्रतीक है।
अंधविश्वास और ढोंगी बाबाबुवाओं का समर्थन नहीं
किशोर जामदार ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रशासन में जनहित को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। भ्रष्टाचार को किसी प्रकार का संरक्षण नहीं दिया जाता था और अन्याय करने वाले अधिकारियों को कठोर दंड दिया जाता था। उन्होंने अंधविश्वास और ढोंगी बाबाबुवाओं को कभी समर्थन नहीं दिया।
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व्यक्तिपूजा से दूर
उन्होंने वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के सत्ताधारी शिवाजी महाराज के लोककल्याणकारी और व्यक्तिपूजा से दूर आदर्शों से असहज महसूस करते हैं, लेकिन व्यवहार में लोककल्याण करने के बजाय केवल घोषणाएं करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रा। रमेशचंद्र दहिवडे ने की। प्रस्तावना राजेश पिंजरकर ने रखी, जबकि आभार प्रदर्शन अरुण भेलके ने किया। जनजागृति कार्यक्रम में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता तथा नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
