चंद्रपुर में उद्धव ठाकरे और संदीप गिरहे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Sandeep Girhe Shiv Sena UBT: चंद्रपुर में शिवसेना (यूबीटी) के स्थानीय जिला प्रमुख संदीप गिरहे ने स्पष्ट किया कि चंद्रपुर मनपा में महापौर चुनाव के दौरान पार्टी के पार्षद भाजपा के साथ मिलकर सत्ता स्थापना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के पार्षदों की कांग्रेस के साथ ही सत्ता में बैठने की अंतिम क्षणों तक इच्छा थी किंतु कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की ओर से उन्हें अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिल रहा था।
अतः उन्होंने अंतिम क्षणों में भाजपा को समर्थन देकर सत्ता स्थापना का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि चंद्रपुर मनपा में कांग्रेस के साथ सत्ता में शामिल होने के लिए वे हर्षवर्धन सपकाल, सुनील केदार तथा विजय वडेट्टीवार के साथ निरंतर संपर्क में थे। कांग्रेसी नेताओं के साथ हो रही बातचीत का ब्योरा समय-समय पर शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे, वरुण सरदेसाई तथा सुषमा अंधारे के साथ साझा किया जा रहा था।
गिरहे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के विजय वडेट्टीवार सकारात्मक थे, किंतु कांग्रेस सांसद प्रतिभा धानोरकर की उन्हें साथ लेने की कोई तैयारी नहीं थी। वे यह मानकर चल रही थीं कि शिवसेना (यूबीटी) कांग्रेस के साथ ही रहेगी और कहीं अन्यत्र नहीं जाएगी।
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जब महापौर चुनाव का दिन आया और कांग्रेस उन्हें महापौर पद देने के लिए तैयार नहीं दिखी, तब भाजपा नेताओं की ओर से महापौर पद का प्रस्ताव आया। अन्य पदों को लेकर हुई चर्चा की जानकारी भी उन्होंने जिला प्रमुख होने के नाते वरुण सरदेसाई को दी थी।
गिरहे ने कहा कि उनकी पत्नी मनस्वी को भाजपा में प्रवेश का प्रस्ताव मिला था किंतु उनका आग्रह था कि यदि वे महापौर बनेंगी तो शिवसेना (यूबीटी) में रहकर ही बनेंगी, वे उद्धव के साथ किसी भी प्रकार की गद्दारी नहीं करेंगी। यदि भाजपा के साथ हाथ मिलाकर चंद्रपुर मनपा में सत्ता स्थापना करना उनकी गलती है तो उन्हें विश्वास है कि उद्धव ठाकरे उनकी इस गलती को अवश्य माफ करेंगे।