राज ठाकरे व उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)
MNS attack On Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से ‘ठाकरे बनाम ठाकरे’ की जंग तेज हो गई है। इस बार विवाद का केंद्र बना है चंद्रपुर नगर निगम का महापौर (Mayor) चुनाव। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें राजनीतिक अवसरवादिता का दोषी ठहराया है।
मनसे के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि उद्धव गुट की शिवसेना ने चंद्रपुर में अपने स्वार्थ के लिए उन सिद्धांतों को ताक पर रख दिया है, जिनका वे अक्सर ढोल पीटते हैं। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी अब केवल सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। उन्होंने विशेष रूप से संजय राउत को निशाने पर लेते हुए कहा कि जो लोग दिन-रात नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं, वे चंद्रपुर में अपनी ही पार्टी के पार्षदों को एकजुट रखने में नाकाम रहे हैं।
संजय राउत, जो अक्सर भाजपा और शिंदे गुट पर हमलावर रहते हैं, इस बार खुद बैकफुट पर नज़र आ रहे हैं। मनसे ने सवाल उठाया है कि आखिर क्यों उद्धव सेना के नगरसेवक भाजपा के संपर्क में आए? मनसे का दावा है कि उद्धव ठाकरे का अपने कार्यकर्ताओं पर से नियंत्रण खो चुका है। देशपांडे ने चुटकी लेते हुए कहा कि संजय राउत को दूसरों के घरों में झांकने के बजाय अपना घर संभालना चाहिए।
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चंद्रपुर महानगरपालिका में किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण निर्दलीयों और छोटे दलों की भूमिका अहम हो गई थी। ऐसे में विपक्षी गठबंधन (महाविकास अघाड़ी) में फूट पड़ने की खबरों ने हलचल मचा दी है। मनसे का कहना है कि शिवसेना (UBT) ने पर्दे के पीछे से ऐसी चालें चलीं जिससे कांग्रेस और उनके बीच की दरार सार्वजनिक हो गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि चंद्रपुर की इस तकरार का असर आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों पर पड़ सकता है। एक तरफ जहाँ राज ठाकरे अपनी पार्टी को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे के लिए अपने वोट बैंक और गठबंधन के साथियों को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस जुबानी जंग ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में बीएमसी (BMC) सहित अन्य निगम चुनावों में यह लड़ाई और भी उग्र होने वाली है।