ई-लर्निंग (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Chandrapur E-learning Crisis: चंद्रपुर जिले के आदिवासी दुर्गम जीवती तहसील में कई शालाओं के कम्प्युटर व टीवी युनीट धूल खा रहे हैं। बड़े गाजे-बाजे के साथ इन्हें शालाओं में ‘ई-लर्निंग’ हेतु लगाया गया था। परंतु लंबे समय से बिजली बिलों का भुगतान न करने से इसकी बिजली खंडित कर दी गयी। उधर इसका भुगतान करने से संबंधित ग्राम पंचायतों ने हाथ खड़े कर दिये। जिससे शिक्षा विभाग के ‘ई-लर्निंग’ का सुपड़ा साफ होने की बात यहां सामने आ रही है।
केंद्र और राज्य सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘ई-लर्निंग’ मुहिम ने जीवती तहसील के मानिकगढ़ पहाड़ी इलाके में पालकों की उम्मीदें बढ़ा दी थीं। लेकिन, जिले के 45 स्कूलों में बिजली कनेक्शन न होने की वजह से ‘ई-लर्निंग’ की पहल सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित रह गई है। ग्राम पंचायतों के बिजली बिल भरने से मना करने की वजह से स्कूलों में सारी सामग्री धूल में मिल गयी है।
पंचायत समिति के तहत 6 केंद्र हैं, जिनके नाम हैं जीवती, येल्लापुर, वनी, टेकामांडवा, शेंगाव, पाटन और कुल 121 जिला परिषद स्कूल इनमें से गनेरी, गोंदापुर, टाटाकोहाड़, हटकरगुडा, कुसुंबी, चोपनगुडा, बेलगाम, घाटराईगुडा, झालीगुडा, टिटवी, खड़की हीरापुर, कामतगुडा, राहापल्ली समेत करीब 45 से 50 स्कूलों में बिजली नहीं है।
सरकार की तरफ से स्कूलों को दिए गए LED टीवी और कंप्यूटर सेट धूल में पड़े हैं। बिजली का बिल न भरने की वजह से महावितरण ने बिजली कनेक्शन काट दिया। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए जिला परिषद के शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूलों को पत्र लिखकर साफ निर्देश दिए कि ग्राम पंचायतें स्कूलों के बिजली बिल भरें। हालांकि, इस पत्र में यह भी शामिल नहीं था।
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कम्प्यूटराइज्ड ग्रामीण महाराष्ट्र और PESA के तहत ग्राम पंचायतों को 15वें वित्त आयोग के कृति प्रारुप योजना के तहत मानव संसाधन विकास पर कम से कम 25 प्रश फंड खर्च करना होता है। असल में, कई ग्राम पंचायतों पर इस नियम को नजरअंदाज करने का आरोप पालकों ने लगाया है।
कुछ जगहों पर, सिर्फ कागज दिखाने के लिए स्कूलों को सस्ते टीवी सेट दिए गए। चर्चा है कि इसमें ज़्यादा कीमत का बिल भी जोड़ा गया है। इन सब चीज़ों की वजह से आदिवासी बहुल, दूर-दराज़ और पिछडे जिवती तहसील के गरीब छात्र अच्छी शिक्षा से वंचित रह गए।