NCP विलय का रास्ता साफ! 80% विधायक तैयार, अजित के करीबी के दावे से मची हलचल, तटकरे बोले- BJP से पूछना पड़ेगा

NCP Merger News: डिप्टी सीएम अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के 'विलय' की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
80% of Ajit Pawar's MLAs are ready for a merger with Sharad Pawar's faction, claims MLA Hiraman Khoskar.
शशिकांत शिंदे और सुनील तटकरे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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NCP Reunion Plan: डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद राकां के दोनों गुटों के विलय की मांग जोर पकड़ रही है। हालांकि अभी तक शरद पावर गुट के नेता इस पर मुखर होकर बोल रहे थे। जबकि अजित पवार गुट के सीनियर नेता इससे भाग रहे थे लेकिन अब अजित के करीबी विधायक हिरामन खोसकर ने दावा किया है कि हमारी पार्टी के 80 प्रतिशत विधायक विलय के लिए तैयार हैं।

उनके मुताबिक जिस दिन सुनेत्रा पवार ने डिप्टी चीफ मिनिस्टर के तौर पर शपथ ली थी। उस दिन राकां के दोनों गुटों के विलय पर भी चर्चा हुआ और 40 में से 30-35 विधायक इसके लिए तैयार थे। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार से मिल कर दोनों गुटों के विलय की सिफारिश करेंगे। वे इस बारे में पार्टी के सीनियर नेता सुनील तटकरे और प्रफुल पटेल से भी रिक्वेस्ट करेंगे।

इगतपुरी के विधायक ने कहा कि अगर हम लोग अपने दिवंगत नेता (अजित पवार) को सच्ची श्रद्धांजलि देना चाहते हैं तो दोनों गुटों का विलय हो जाता है तो हमें शरद पवार गुट के नेताओं ने दावा किया था कि 17 जनवरी को हुई बैठक में अजित पवार ने दोनों गुटों के विलय के प्लान को मंजूरी देते हुए 12 फरवरी को इसके औपचारिक ऐलान की बात कही थी लेकिन इससे पहले 28 जनवरी को विमान हादसे में उनकी मौत हो गई।

छोटे पवार संभालने वाले थे कमान

राकां शरद पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने दावा किया है कि 17 जनवरी को हुई मीटिंग में राकां के दोनों गुटों के विलय की बातचीत फाइनल हो गई थी और तत्कालीन डिप्टी सीएम अजित पवार पार्टी की कमान संभालने वाले थे। उन्होंने पार्टी की साप्ताहिक पत्रिका में लिखे गए एक लेख में कहा है कि विलय के बाद पार्टी का पूरा नेतृत्व अजित पवार को सौंपने का फैसला लिया गया था।

बीजेपी से पूछना पड़ेगा : तटकरे

राकां अजित पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने शिंदे को फटकारते हुए कहा कि विलय जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पब्लिक में ऐसा बयान देना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि अजित पवार का भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का रुख कई साल पुराना है। उन्होंने 2014, 2016 और 2019 के समय भी भाजपा के साथ हाथ मिलाने की सिफारिश की थी।

2019 में भी यह बातचीत फाइनल स्टेज में थी। अजित पवार का मानना था कि बीजेपी और राकां महाराष्ट्र को एक स्थिर सरकार दे सकती है और केंद्र से भी मदद मिल सकती है। फिलहाल हम लोग बीजेपी की अगुवाई में बनी एनडीए में शामिल हैं। ऐसे में राकां के दोनों गुटों के विलय के लिए बीजेपी से पूछना पड़ेगा।

शिंदे ने कहा कि यह फैसला हम लोगों ने काफी सोच-समझकर लिया था, ताकि पार्टी एकजुट होकर आगे बढ़ सके। हालांकि विमान हादसे की वजह से दादा का यह सपना अधूरा रह गया लेकिन अब उसे पूरा करना हम सबकी जिम्मेदारी है। शिंदे ने यह भी दावा किया कि दिवंगत डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजित पवार को अदृश्य ताकतों की धमकियों और साजिशों के कारण मूल राकां को छोड़कर बीजेपी पास जाना पड़ा।

अनुभवी नेताओं की जरूरत

विधायक खोसकर ने कहा है कि हमें अनुभवी नेताओं के मार्गदर्शन की जरूरत है। अगर दोनों गुटों का विलय हो जाता है तो हमें शरद पवार जैसे अनुभवी के अलावा जयंत पाटिल, बालासाहेब पाटिल व राजेश टोपे जैसे नेताओं का साथ मिलेगा। इससे राकां और भी मजबूत होगी।

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