चंद्रपुर के जिवती में मातंग समाज का विशाल मोर्चा, अनुसूचित जाति आरक्षण के उपवर्गीकरण की उठी मांग
Jiwati Matang Community Protest: सकल मातंग समाज ने चालू शैक्षणिक सत्र से एससी आरक्षण का उपवर्गीकरण लागू करने की मांग को लेकर जिवती में विशाल मोर्चा निकाला और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
- Written By: केतकी मोडक
मोर्चा प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Matang Samaj Morcha Chandrapur: अनुसूचित जाति आरक्षण के उपवर्गीकरण को चालू शैक्षणिक सत्र से ही लागू किए जाने की प्रमुख मांग को लेकर सकल मातंग समाज की ओर से गुरुवार को जिवती में विशाल मोर्चा निकाला गया। समाज के राज्य समन्वयक डॉ। अंकुश गोतावले ने कहा कि सामाजिक समानता और आरक्षण के न्यायसंगत वितरण के लिए उपवर्गीकरण को तत्काल लागू किया जाना आवश्यक है।
वंचित घटकों को न्याय मिलना जरूरी
मोर्चे की शुरुआत भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं अभिवादन के साथ हुई। डॉ. अंकुश गोतावले और एडवोकेट दत्तराज गायकवाड के नेतृत्व में निकला यह मोर्चा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए तहसील कार्यालय पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी की, जिससे पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
रास्ते में बड़ी संख्या में नागरिकों के शामिल होने से मोर्चे का स्वरूप और भी व्यापक हो गया। तहसील कार्यालय के समक्ष मोर्चा एक जनसभा में परिवर्तित हो गया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आरक्षण के लाभों का सभी वंचित घटकों तक समान और न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करने के लिए उपवर्गीकरण अत्यंत आवश्यक है। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार को विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
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आंदोलन के सफल आयोजन के लिए प्रो. सुग्रीव गोतावले, अंबादास कांचकटले, विजय गोतावले, दत्ता तोगरे, भानुदास जाधव, देवीदास कांबले, यादव भालेराव, डॉ. चरण केदासे, गजानन गायकवाड, भगवान डुकरे, मारोती मोरे, संभाजी गायकवाड, रणजीत सूर्यवंशी सहित अनेक समाजबंधुओं ने विशेष परिश्रम किए। इस आंदोलन के माध्यम से जिवती क्षेत्र में मातंग समाज की उल्लेखनीय एकजुटता देखने को मिली।
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कुछ जातियों ने अन्य की तुलना में की अधिक प्रगति
अनुसू संगठन का कहना है कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्गों में कुछ जातियों ने अन्य जातियों की तुलना में अधिक प्रगति की है, जिसके कारण आरक्षण का अधिकांश लाभ उन्हीं अपेक्षाकृत आगे बढ़े हुए वर्गों तक सीमित रह जाता है।
संगठन के अनुसार, उपवर्गीकरण लागू होने से अब तक वंचित और पिछड़े समुदायों को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिल सकेगा। साथ ही अति-वंचित जातियों के लिए आरक्षण में निश्चित हिस्सा सुनिश्चित कर उन्हें सामाजिक न्याय प्रदान किया जा सकेगा।
