आदित्य ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Aaditya Thackeray On Tadoba Mining Controversy: महाराष्ट्र के पारिस्थितिक संतुलन पर मंडराते खतरों के बीच, पूर्व पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने चंद्रपुर जिले के ताडोबा अंधारी बाघ अभयारण्य (TATR) के इको-सेंसिटिव कॉरिडोर में प्रस्तावित खनन कार्यों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे प्रकृति के विरुद्ध एक घातक कदम बताया है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को लिखे एक आधिकारिक पत्र में आदित्य ठाकरे ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित परियोजनाएं न केवल घने वनों को नष्ट करेंगी, बल्कि उन वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा करेंगी जो इन गलियारों का उपयोग करते हैं। ठाकरे के अनुसार, इन परियोजनाओं से होने वाली ‘पारिस्थितिक क्षति’ की भरपाई कभी नहीं की जा सकेगी।
मामला जनवरी के पहले सप्ताह का है, जब महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव बोर्ड (SBWL) ने घोडाझरी अभयारण्य के पास ‘लोहारडोंगरी’ और ताडोबा कॉरिडोर के भीतर ‘मार्की-मंगली’ में खनन कार्यों को हरी झंडी दे दी थी। ठाकरे ने आरोप लगाया कि बोर्ड की बैठक के दौरान कई सदस्यों ने इन परियोजनाओं के प्रति कड़ा विरोध दर्ज कराया था। हालांकि, उनकी असहमति और चिंताओं को दरकिनार करते हुए अध्यक्ष द्वारा इसे मंजूरी प्रदान कर दी गई।
आदित्य ठाकरे ने अपने पत्र में आर्थिक पक्ष पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इन खदानों से मिलने वाला संभावित राजस्व और उत्पादन, पर्यावरण को होने वाले भारी नुकसान की तुलना में बेहद मामूली है। उनके अनुसार, नगण्य राजस्व के लिए राज्य की सबसे महत्वपूर्ण टाइगर हैबिटेट को जोखिम में डालना तर्कसंगत नहीं है।
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केंद्रीय मंत्री से विनम्र आग्रह करते हुए ठाकरे ने कहा, “हमारे वनों और जीव-जंतुओं का भविष्य अब आपके हाथों में है।” उन्होंने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) से इन प्रस्तावों पर पुनर्विचार करने और इन्हें पूरी तरह खारिज करने की मांग की। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि केंद्र इन परियोजनाओं को रोकता है, तो यह संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक मिसाल होगी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगी।