बुलढाना का लोणार सरोवर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Lonar Sarovar Water Level News: विश्व की एकमात्र बेसाल्टिक उल्कापिंड झील, ‘लोणार सरोवर’ पर प्रकृति और प्रशासन की अनदेखी का दोहरा संकट मंडरा रहा है। बढ़ते जल स्तर के कारण सदियों पुरानी मंदिर विरासत जलमग्न हो रही है, जिसे देखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने अब खुद कमान संभालते हुए जनहित याचिका दायर करने के निर्देश दिए हैं।
महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ ने समाचारों के आधार पर मामले का स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने अधिवक्ता मोहित खजांची को ‘अमीकस क्यूरी’ (न्यायालय मित्र) नियुक्त करते हुए अगले सात दिनों के भीतर एक औपचारिक जनहित याचिका (PIL) पेश करने का आदेश दिया है। अदालत का उद्देश्य इस दुर्लभ क्रेटर और इसके आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र को स्थायी क्षति से बचाना है।
पिछले कुछ महीनों में सरोवर के जल स्तर में लगभग 15 से 20 फीट की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। इस वृद्धि का सबसे भयावह प्रभाव यहां स्थित प्राचीन महादेव मंदिरों और दीपमालाओं पर पड़ा है, जो अब आंशिक या पूर्ण रूप से पानी के नीचे हैं। विशेष रूप से, ऐतिहासिक कमलजा माता मंदिर का गर्भगृह और ओटा पानी में डूब चुका है। स्थिति इतनी गंभीर है कि देवी की प्रतिमा का मुख भी जलमग्न होने की कगार पर है, जिससे स्थानीय श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों में भारी रोष है।
लोणार झील अपनी खारी और क्षारीय (Alkaline) प्रकृति के लिए जानी जाती है। वर्तमान में झील में चार मुख्य स्रोतों और विभिन्न झरनों से पानी आ रहा है। चिंता का विषय यह है कि इस खारे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र में अब मछलियाँ देखी जा रही हैं, जो इसकी मूल जैव विविधता के नष्ट होने का संकेत है। वैज्ञानिक अब तक इस बात का सटीक जवाब नहीं दे पाए हैं कि जल स्तर इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है और क्या इसके पीछे कोई भूगर्भीय हलचल या भूमिगत जल स्रोतों में बदलाव है।
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बढ़ते विवाद और जन आक्रोश के बीच प्रशासन ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार के निर्देश पर छत्रपति संभाजीनगर के भूजल विशेषज्ञ प्रो. अशोक तेजनकर और तहसीलदार भूषण पाटिल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सतही निरीक्षण पर्याप्त नहीं है। जल्द ही एक विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण और डेटा विश्लेषण किया जाएगा ताकि जल स्तर बढ़ने के सटीक कारणों का पता लगाकर इस ‘मेटियोराइट क्रेटर’ को संरक्षित किया जा सके।