विश्व विरासत दिवस; 800 साल पुराने हेमाड़पंती मंदिर का हुआ कायाकल्प, लेकिन भंडारा का ‘पांडे महल’ अब भी उपेक्षित
विश्व विरासत दिवस पर भंडारा की ऐतिहासिक संपदा की पड़ताल। मेंढा के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार तो हुआ, लेकिन 125 साल पुराने नगर परिषद शेड और पांडे महल को संरक्षण का इंतजार है।
Bhandara News: भंडारा में 18 अप्रैल को पूरी दुनिया में विश्व विरासत दिवस वर्ल्ड हेरिटेज डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य पूर्वजों की ओर से विरासत में दी गई वास्तुकला और संस्कृति को सहेजना है।
शहर के मेंढा स्थित प्राचीन हेमाड़पंती मंदिर जिले की वास्तुकला का एक अनमोल नमूना है। लगभग 800 साल पुराने ये मंदिर हमारी संस्कृति के जीवंत प्रमाण हैं। संतोष की बात यह है कि इस मंदिर को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है और पुरातत्व विभाग की ओर से हाल ही में इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार का कार्य पूरा किया गया है। लेकिन जिले की अन्य धरोहरों के हिस्से में अब भी केवल बदहाली ही आई है।
ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण पांडे महल जैसी भव्य वास्तुकला आज भी पुरातत्व विभाग की नजरों से ओझल और उपेक्षित है। अंग्रेजों की ओर से वैनगंगा परगना जीतने के बाद 1818 में सर पी. विलकिन्सन की नियुक्ति की गई और 1822 में भंडारा मुख्य प्रशासनिक केंद्र बना। इस दौरान कई मजबूत इमारतें बनाई गईं। इसमें पुरानी बारादरी व प्रवेश द्वार मुख्य है।
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1853 में बस स्टैंड के पास बना यह प्रवेश द्वार आज भी इतिहास की गवाही देता है। 1870 में बनी कृषि उपज मंडी समिति बड़ा बाजारकी इमारत व्यापारिक क्षेत्र में भंडारा के महत्व को रेखांकित करती है। 1900 में लोहे, ईंट और टिन से बना नगर परिषद शेड 125 साल बाद भी मजबूती से खड़ा है, जो तत्कालीन इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। भंडारा का इतिहास केवल प्रशासनिक भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक रूप से भी समृद्ध है।
बजरंग चौक स्थित रामदासी मठ के बारे में कहा जाता है कि 400 साल पहले समर्थ रामदास स्वामी भंडारा प्रवास के दौरान यहां रुके थे। शिवाजी और शुक्रवारी वार्ड में 13वीं शताब्दी के मंदिर, छतरियां और बोडी तालाब मौजूद हैं। इन प्राचीन शिल्पकला के नमूनों पर अब प्रदूषण और वक्त की धूल जम चुकी है। पिंगलाई मंदिर जैसी वास्तुकला भी संरक्षण की बाट जोह रही है।
भंडारा की इस अनमोल धरोहर को बचाने के लिए ग्रीन हेरिटेज पर्यटन संस्था के संस्थापक अध्यक्ष मो. सईद शेख ने महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने इन स्थलों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उनका मानना है कि यदि पर्यटन के माध्यम से इन स्थलों का विकास किया जाए, तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और भंडारा के गौरवशाली इतिहास की पहचान दुनिया तक पहुंचेगी।
पांडे महल को संरक्षण की जरूरत
भंडारा की ऐतिहासिक संपदा को संजोना समय की मांग है। मेंढा के मंदिर का जीर्णोद्धार एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन पांडे महल और ब्रिटिशकालीन निर्माणों को भी इसी तरह के संरक्षण की जरूरत है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि इन स्थलों को हेरिटेज सर्किट के रूप में विकसित किया जाए। मो. सईद शेख, संस्थापक अध्यक्ष, ग्रीन हेरिटेज पर्यटन संस्था, भंडारा।
