बघेड़ा जर्जर सड़क और नुकीले पत्थरों से राहगीर बेहाल, जलाशय मार्ग की बदहाली से खेती और पर्यटन पर बुरा असर
बघेड़ा जलाशय मार्ग जर्जर होने से किसानों और पर्यटकों को भारी परेशानी हो रही है। नुकीले पत्थरों के कारण दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, ग्रामीण प्रशासन से सड़क मरम्मत की मांग कर रहे हैं।
Bagheda Reservoir News: बघेड़ा गांव से बघेड़ा जलाशय की ओर जाने वाली मुख्य सड़क इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। कभी सुगम यातायात के लिए पहचानी जाने वाली यह सड़क अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सड़क की ऊपरी सतह उखड़ने से बड़े-बड़े नुकीले पत्थर बाहर निकल आए हैं, जो वाहनों के टायरों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ पैदल चलने वालों के लिए भी खतरा बन गए हैं।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ना आम बात हो गई है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। यह मार्ग केवल संपर्क का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों की जीवनरेखा भी है। बघेड़ा और आसपास के किसान इसी रास्ते से खेतों तक खाद-बीज पहुंचाते हैं और अपनी उपज बाजार तक ले जाते हैं।
सड़क की खराब स्थिति के कारण ट्रैक्टर और कृषि उपकरण ले जाना मुश्किल हो गया है, जिससे खेती-किसानी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं और लागत बढ़ रही है। यह मार्ग पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अंबागढ़ किला, बंदरचुवा और गायमुख तीर्थस्थल जाने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इसी रास्ते का उपयोग करते हैं।
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शॉर्टकट मार्ग होने के कारण इस सड़क पर बाहरी वाहनों का दबाव भी अधिक रहता है। खराब सड़क के चलते पर्यटकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे क्षेत्र के पर्यटन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
सड़क की दयनीय स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ गहरा असंतोष है। इस जनसमस्या को उठाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर रहांगडाले ने शासन-प्रशासन से शीघ्र मरम्मत की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क पर निकले पत्थरों के कारण विशेषकर रात में सफर करना बेहद खतरनाक हो गया है और समय रहते सुधार नहीं हुआ तो बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बारिश से पहले इस मार्ग का डामरीकरण या विशेष मरम्मत कार्य कराया जाए, ताकि किसानों, ग्रामीणों और पर्यटकों को राहत मिल सके।
