भंडारा: बाल संगोपन योजना से 4,215 बच्चों को मिल रहा पारिवारिक स्नेह, हर महीने खातों में जमा हो रहे 94.83 लाख
भंडारा जिले में 'क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले बाल संगोपन योजना' के तहत 4,215 बच्चों को ₹2,250 मासिक सहायता दी जा रही है। अनाथ बच्चों के सर्वांगीण विकास में यह योजना वरदान साबित हो रही है।
Bhandara Bal Sangopan Yojana News: भंडारा मातापिता का साया खो चुके या पारिवारिक संकटों का सामना कर रहे बच्चों को अनाथालयों की चारदीवारी के बजाय पारिवारिक माहौल में बढ़ने का अवसर देने के उद्देश्य से संचालित क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले बाल संगोपन योजना भंडारा जिले में वरदान साबित हो रही है।
वर्तमान में जिले के 4,215 बच्चे इस योजना के माध्यम से लाभान्वित हो रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित इस योजना का मूल आधार मनोवैज्ञानिक सत्य है कि बच्चे का सर्वांगीण विकास संस्थागत देखभाल की तुलना में परिजनों के स्नेहपूर्ण वातावरण में बेहतर होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, जो बच्चे बेघर हैं या जिनके अभिभावक गंभीर बीमारी या मृत्यु के कारण पालनपोषण में असमर्थ हैं, उन्हें उनके नजदीकी रिश्तेदारों जैसे दादादादी, नानानानी, मामा या बड़े भाईबहन के पास रखकर पालनपोषण के लिए सीधी आर्थिक मदद दी जाती है।
पहले इस योजना के तहत लाभार्थियों को प्रति माह 1,200 रुपये दिए जाते थे, लेकिन बढ़ती महंगाई और शिक्षा के खर्च को देखते हुए सरकार ने इस राशि में वृद्धि की है। अब प्रत्येक पात्र बच्चे के बैंक खाते में प्रति माह 2,250 रुपये सीधे जमा किए जा रहे हैं। भंडारा जिले में वर्तमान में 4,215 लाभार्थियों के खातों में हर महीने कुल 94 लाख 83 हजार 750 रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भेजी जा रही है।
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कोरोना महामारी के दौरान अपने मातापिता दोनों को खोने वाले बच्चों के लिए केंद्र सरकार की पीएम केयर्स फंड फॉर चिल्ड्रन्स योजना के तहत विशेष कवच प्रदान किया गया है। ऐसे बच्चों को 15 वर्ष की आयु तक 4,000 रुपये प्रति माह का विशेष अनुदान दिया जाता है, जो उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक अहम कदम है। योजना का लाभ लेने के लिए ग्राम, तहसील और वार्ड स्तर पर बाल संरक्षण समितियों के पास आवेदन करना होता है।
इसके बाद जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी गृह भेंट कर सामाजिक जांच करते हैं। अंतिम मंजूरी जिला बाल कल्याण समिति की ओर से दी जाती है। हालांकि, योजना काफी प्रभावी है, लेकिन कभी-कभी तकनीकी कारणों या निधि की कमी से अनुदान मिलने में होने वाली देरी लाभार्थियों के लिए चिंता का विषय बन जाती है।
- सामान्य मासिक अनुदान 2,250 रुपयेकोरोना अनाथ बच्चों हेतु अनुदान 4,000 रुपयेहर माह वितरित कुल राशि 94,83,750 रुपयेबाक्ससमिति की मंजूरी के बाद मिलता है लाभ।
- बाल न्याय अधिनियम 2015 के अनुसार, देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को जिला बाल कल्याण समिति की मंजूरी के बाद लाभ दिया जाता है। वर्ष 2025-26 में जिले के 4,215 लाभार्थी हैं, जिनके खातों में 2,250 रुपये की सहायता दी जा रही है। तकनीकी प्रक्रिया के कारण कभी-कभी भुगतान में देरी होती है, लेकिन प्रक्रिया पूरी होते ही बकाया राशि वितरित कर दी जाती है। अरुण बांदुरकर, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, भंडारा।
