समग्र शिक्षा अभियान के संविदा कर्मियों का हल्लाबोल, मांगों को लेकर भंडारा जिला स्तर पर आंदोलन
Samagra Shiksha Abhiyan: भंडारा में समग्र शिक्षा अभियान के संविदा कर्मचारियों ने स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर एक दिवसीय आंदोलन किया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है।
Samagra Shiksha Abhiyan (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Bhandara Contract Employees Protest: पिछले दो दशकों से राज्य के शिक्षा विभाग में अल्प मानदेय पर कार्यरत समग्र शिक्षा अभियान के संविदा कर्मचारियों ने अपने हक के लिए संघर्ष तेज कर दिया है। इसी कड़ी में शुक्रवार को भंडारा जिला स्तर पर एक दिवसीय आंदोलन किया गया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार महिला कर्मचारी मुंडन कर सरकार का विरोध करने वाली थीं, लेकिन प्रशासन की ओर से 14 मई को बैठक का आश्वासन मिलने के बाद मुंडन आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
प्रलंबित है विभिन्न मांगेंउल्लेखनीय है कि 2003 में शुरू हुए सर्व शिक्षा अभियान के तहत विषय साधन व्यक्ति, विशेष शिक्षक, डेटा एंट्री ऑपरेटर, इंजीनियर और जिला समन्वयक जैसे पदों पर कर्मचारियों की भर्ती छह महीने के अनुबंध पर की गई थी। आज 20 से 25 साल बीत जाने के बाद भी ये कर्मचारी संविदा पर ही काम कर रहे हैं।
257 कर्मचारियों की विभिन्न कारणों से मृत्यु
आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस लंबी अवधि के दौरान सेवा में नियमित होने की प्रतीक्षा करते हुए करीब 257 कर्मचारियों की विभिन्न कारणों से मृत्यु हो गई, लेकिन सरकार ने अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दिया है। संघर्ष समिति की मुख्य मांगों में सभी 3,000 संविदा कर्मचारियों को शासकीय सेवा में स्थायी करना शामिल है।
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उनका सवाल है कि जब इसी अभियान के दिव्यांग विभाग के कर्मचारियों को 2024 में नियमित किया गया, तो शेष कर्मचारियों को क्यों छोड़ दिया गया कर्मचारियों ने याद दिलाया कि 2012 में तत्कालीन विपक्ष के नेताओं और 2025 में स्वयं मुख्यमंत्री ने उन्हें स्थायी करने का आश्वासन दिया था, जो अब तक अधूरा है।
46 कर्मचारियों की आंदोलन में सक्रिय सहभागिता
जिले के 46 कर्मचारी आंदोलन में सक्रिय भंडारा जिले के 46 कर्मचारियों ने इस आंदोलन में सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई, जिनमें आर। डी। वाडीभस्मे, सविता कानतोडे, संपदा लाखडे, अश्विन रामटेके, दिनकर मानापुरे, दीप्ती ठवकर सहित कई महिला व पुरुष कर्मचारी शामिल थे।
इस आंदोलन को महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति और सांसद प्रशांत पडोले ने भी अपना समर्थन दिया है। अब सभी की निगाहें 14 मई को होने वाली बैठक पर टिकी हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि बैठक में सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ, तो वे मुंडन, स्वेच्छामृत्यु और जलसमाधि जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
