‘पढ़ाई करने की उम्र नहीं होती’, 47 साल के कालीन कारीगर ने पास की 10 वीं की परीक्षा, पेश किया उदाहरण
Mohammed Jamil 10th Class Success Washim: वाशिम के 47 वर्षीय मोहम्मद जमील ने बनाया रिकॉर्ड। 31 साल बाद 10वीं की परीक्षा 54.20% अंकों के साथ पास कर मिसाल पेश की।
- Written By: अनिल सिंह
मोहम्मद जमील पास की 10 वीं की परीक्षा (फोटो क्रेडिट-X)
Mohammed Jamil 10th Class: महाराष्ट्र के वाशिम जिले में स्थित रिसोड कस्बे के लोनी फाटा इलाके में रहने वाले मोहम्मद जमील नूर मोहम्मद पेशे से गद्दे और कालीन बनाने का काम करते हैं। शुक्रवार को जब 10वीं कक्षा के परिणाम घोषित हुए, तो जमील के घर में ईद जैसा माहौल था। उनके बेटे ने जैसे ही कंप्यूटर पर पिता का रिजल्ट ‘पास’ देखा, पूरे मोहल्ले में खुशी की लहर दौड़ गई। 47 साल की उम्र में मिली यह कामयाबी केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि तीन दशकों से अधूरे पड़े एक सपने की जीत है।
मोहम्मद जमील ने साल 1995 में पहली बार 10वीं की परीक्षा दी थी, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक तंगी के कारण वे उस समय सफल नहीं हो सके। घर चलाने के लिए उन्हें पढ़ाई छोड़कर कालीन बनाने के पुश्तैनी काम में जुटना पड़ा। वक्त बीतता गया, शादियां हुईं, बच्चे हुए, लेकिन जमील के मन में पढ़ाई का जो दीया बुझ गया था, उसकी कसक हमेशा बनी रही। उन्होंने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई, लेकिन खुद के ‘अनपढ़’ रह जाने का मलाल उन्हें बार-बार सताता था।
बच्चों की उम्र के छात्रों के साथ दी परीक्षा
जब उनके बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने लगे, तो जमील को लगा कि अब जिम्मेदारियां थोड़ी कम हुई हैं। उन्होंने अपने परिवार से फिर से पढ़ाई करने की इच्छा जताई। उनके बच्चों और पत्नी ने उन्हें पूरा समर्थन दिया। 47 साल की उम्र में, जब लोग रिटायरमेंट की सोचने लगते हैं, जमील ने फॉर्म भरा और अपने बच्चों की उम्र के छात्रों के साथ परीक्षा केंद्र पहुंचे। शुरुआती हिचकिचाहट के बाद, अन्य छात्रों ने भी उनके इस जज्बे को सलाम किया और उन्हें प्रोत्साहित किया।
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सफलता का मंत्र: हार मत मानो
मोहम्मद जमील की सफलता उन युवाओं के लिए एक कड़ा संदेश है जो छोटी-मोटी असफलताओं से टूट जाते हैं। जमील ने कहा, “जब मैं परीक्षा हॉल में बैठा था, तो मुझे लग रहा था कि मैं फिर से वही 18 साल का लड़का बन गया हूं। मेरे बच्चों के लिए यह देखना कौतूहल भरा था कि उनके पिता पास होंगे या नहीं, लेकिन मेरी सफलता ने उन्हें सबसे ज्यादा खुशी दी है।”
आगे का रास्ता
जमील की यह यात्रा 10वीं तक सीमित नहीं रहने वाली है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अब 12वीं और उसके बाद कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी करेंगे। उनका मानना है कि शिक्षा केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और दुनिया को देखने का नजरिया बदलने के लिए जरूरी है। रिसोड के स्थानीय लोगों ने केक काटकर और माला पहनाकर अपने इस ‘छात्र’ का जोरदार स्वागत किया।
