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लाखांदूर-पवनी के किसानों के लिए राहत, गोसीखुर्द परियोजना से ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए पानी छोड़ा गया
- Written By: अंकिता पटेल
Bhandara Gosikhurd Dam: भंडारा जिले में गोसीखुर्द राष्ट्रीय परियोजना से 30 जनवरी से ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए पानी छोड़ा गया है, जिससे लाखांदूर व पवनी के दर्जनों गांवों को राहत मिली।

प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Bhandara Canal Water Release: भंडारा विदर्भ की जीवनदायिनी मानी जाने वाली गोसीखुर्द राष्ट्रीय परियोजना से ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए पानी छोड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। किसानों की लंबे समय से जारी मांग और फसलों की आवश्यकता को देखते हुए, प्रशासन ने 30 जनवरी को गोसीखुर्द बांध की बाई मुख्य नहर से शाखा नहर क्रमांक-1 में जल विसर्जन प्रारंभ कर दिया, सिंचाई विभाग के इस निर्णय से लाखांदूर और पवनी तहसील के दर्जनों गांवों के किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है।
परियोजना के पहले चरण में छोड़े गए इस पानी का लाभविशेष रूप से उन क्षेत्रों को मिलेगा जो बाई नहर क्रमांक-1 के अंतर्गत जल उपयोग संस्थाओं के कार्यक्षेत्र में आते हैं। इसमें लाखांदूर तहसील के मासल, बेलाटी, सोनेगांव, घोड़ेजरी, हरदोली, तई (खुर्द), तई (बुज), और खैरी घर जैसे गांव शामिल हैं।
वहीं पवनी तहसील के भावड, शेंद्री, खखैरी-तेलोता और ब्रम्ही सहित कई अन्य सीमावर्ती गांवों को भी प्रत्यक्ष सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। जल संसाधन विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे पानी की उपलब्धता का लाभ उठाते हुए ग्रीष्मकालीन फसलों की बुआई समय पर पूर्ण करें और आवश्यक आधिकारिक पंजीयन भी सुनिश्चित कराएं, वैनगंगा नदी पर निर्मित गोसीखुर्द बांध का इतिहास संघषों और विकास की लंबी गाथा समेटे हुए है।
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भंडारा जिले के बीच से वैनगंगा बहती है, लेकिन जिले के किसानों को लंबे समय तक सूखे और सिंचाई के अभाव का सामना करना पड़ा। वर्ष 1983 में इस परियोजना को मंजूरी मिली और 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इसकी आधारशिला रखी थी। समय के साथ परियोजना की लागत में भी भारी उछाल आया है।
शुरुआत में जो प्रोजेक्ट मात्र 373 करोड़ रुपये का था, वह तकनीकी देरी और विस्तार के कारण अब 18 हजार 495 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। आज यह विदर्भ का सबसे बड़ा बांध है, जिससे भंडारा, नागपुर और चंद्रपुर जिलों की लगभग 2.50 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रीष्मकाल में नहीं होगी पानी की कमी
जल संसाधन विभाग के अनुसार, वर्तमान में गोसेखुट बांध अपनी पूर्ण क्षमता के साथ जलमग्न है। बांध की कुल जल भंडारण क्षमता 245.50 मीटर है और वर्तमान जलस्तर भी इसी स्तर पर बना हुआ है। परियोजना के पूर्ण उपयोग के लिए सरकार की ओर से डूब क्षेत्र में आने बाले गांवों का पुनवीस कार्य भी बड़े स्तर पर किया गया है।
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विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए नवंबर माह की शुरुआत से ही बाच को 100 प्रतिशत भरकर रखा गया था ताकि रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए पानी का संकट न खड़ा हो, गोसेखुर्द बाध के अधिकारी नितिन ठाकरे ने आश्वस्त किया है कि बाध पूरी तरह से भरा होन के कारण आने वाले भीषण गर्मी के दिनों में भी किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
नहरों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट है कि प्रशासन अंतिम छोर के किसानों तक पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस जल विसर्जन से न केवल कृषि उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, बल्लिक क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
Bhandara gosikhurd canal water release summer crops
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