दिव्यांग अधिकारों को लेकर लाखांदुर तहसील कार्यालय के सामने आंदोलन, सरकारी फैसले का विरोध
Bhandara Hunger Strike: भंडारा जिले के लाखांदुर तहसील कार्यालय के सामने दिव्यांग संगठनों ने अपने अधिकारों और सरकारी नीतियों के विरोध में क्रमिक अनशन शुरू किया है।
Disabled Protest (सोर्सः एआय जनरेटेड प्रतिकात्मक फोटो-सोशल मीडिया)
Bhandara Disabled Protest: अपने अधिकारों और सरकार की कथित दिव्यांग विरोधी नीतियों के विरोध में लाखांदुर तहसील कार्यालय के सामने 15 जून से क्रमिक अनशन आंदोलन शुरू किया गया है। विकास गंगा दिव्यांग तहसील स्तरीय संगठन और विश्वास अपंग जन परिवार संगठन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस आंदोलन के कारण तहसील परिसर दिव्यांगों के नारों से गूंज उठा। आंदोलन की शुरुआत आंबेडकर प्रतिमा के पूजन और संविधान की रक्षा की शपथ के साथ की गई।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सामाजिक न्याय और समानता के लिए अपनी आवाज बुलंद की। तहसील कार्यालय परिसर में दिव्यांगों को न्याय दो, सरकारी फैसला रद्द करो और हमारा अधिकार मिलकर रहेगा जैसे नारे गूंज रहे थे, जिससे प्रशासन के प्रति दिव्यांगों की गहरी नाराजगी साफ नजर आ रही थी।
सरकार से नीति में बदलाव की मांग
संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, सरकार के 27 मार्च के फैसले के कारण जिन दिव्यांगों के पास अस्थायी तात्कालिक प्रमाण पत्र हैं, उन्हें सरकारी योजनाओं, मानदेय, यात्रा छूट और अन्य लाभों से वंचित होना पड़ रहा है। ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों के दिव्यांगों को स्थायी प्रमाण पत्र प्राप्त करने में भारी प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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दिव्यांग अधिकार अधिनियम लागू करने की मांग
ऐसे में प्रमाण पत्र अपडेट न होने का सबसे बड़ा खामियाजा ग्रामीण इलाकों के जरूरतमंद दिव्यांगों को भुगतना पड़ रहा है। उबाठा के तहसील प्रमुख विनोद ढोरे ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों का मार्गदर्शन किया और सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए आंदोलन को पूरा समर्थन दिया।
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इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और तहसील के कोनेकोने से आए सैकड़ों दिव्यांग भाईबहन उपस्थित थे। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह क्रमिक अनशन जारी रहेगा।
27 मार्च का सरकारी फैसला तत्काल रद्द करें
आंदोलनकारियों ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में मांग की है कि 27 मार्च का सरकारी फैसला तत्काल रद्द या संशोधित किया जाए, अस्थायी प्रमाण पत्र के आधार पर मिलने वाले लाभ पूर्ववत जारी रखे जाएं, और दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम 2016 व नियम 2017 को सख्ती से लागू किया जाए।
इसके साथ ही बंद किए गए मानदेय को दोबारा शुरू करने और अस्थायी प्रमाण पत्र वाले दिव्यांगों की मेडिकल जांच कर उन्हें जल्द से जल्द स्थायी प्रमाण पत्र वितरित करने की मांग भी की गई है। इस आंदोलन को विभिन्न संगठनों का व्यापक समर्थन मिला है।
