फर्जी मालिक बनाया और बेच दी करोड़ों की जमीन! क्या आपकी जमीन सुरक्षित है? जानें लैंड माफिया की मोडस ऑपरेंडी
Land Mafia Fraud Sambhajinagar: छत्रपति संभाजीनगर में करोड़ों का जमीन घोटाला। लैंड माफिया ने सरकारी राजपत्र और जाली दस्तावेजों के जरिए हड़पी जमीन, सिटी चौक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज।
- Written By: गोरक्ष पोफली
लैंड माफिया की सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)
Chhatrapati Sambhajinagar Land Mafia Scam: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग और आम जनता की नींद उड़ा दी है। यहाँ एक या दो नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इस खेल की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जालसाजों ने सरकारी राजपत्र और आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में हेरफेर कर असली मालिकों को उनकी ही जमीन से बेदखल कर दिया है।
कैसे बुना जाता है धोखाधड़ी का जाल?
इस पूरे घोटाले के पीछे दलालों, पटवारियों और राजस्व विभाग के अधिकारियों की एक गहरी काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दलाल सबसे पहले ऐसी जमीनों को निशाना बनाते हैं जिनके मालिक लंबे समय से वहां नहीं आए हैं, या जो अपनी जमीन पर खेती नहीं कर रहे हैं। वे उन भूस्वामियों को खोजते हैं जिन्होंने क्रॉप रेकॉर्ड, फसल बीमा या किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ नहीं लिया है। इस गोपनीय जानकारी को हासिल करने में पटवारी या उनके मातहत काम करने वाले लोग अहम भूमिका निभाते हैं।
राजपत्र और आधार कार्ड में बड़ी सेंधमारी
एक बार जमीन और असली मालिक की पहचान हो जाने के बाद, असली फर्जीवाड़ा शुरू होता है। सबसे पहले, सरकार के राजपत्र में नाम बदलने का विज्ञापन देकर सातबारा (7/12) पर दर्ज नाम के अनुसार बदलाव करा लिया जाता है। इसी राजपत्र के आधार पर आधार सेवा केंद्रों पर जाकर आधार कार्ड में भी नाम बदल लिया जाता है, ताकि वह सातबारा के रिकॉर्ड से मेल खा सके। इस प्रकार एक बनावट मालिक तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग रजिस्ट्री के समय असली मालिक के तौर पर किया जाता है।
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मुद्रांक विभाग की लापरवाही या मिलीभगत?
हैरानी की बात यह है कि रजिस्ट्री कार्यालय में जब इन फर्जी दस्तावेजों को पेश किया जाता है, तो अक्सर आधार सत्यापन या सर्वर डाउन है जैसे बहाने बनाकर बिना उचित जांच के रजिस्ट्री कर दी जाती है। हीरापुर में करोड़ों रुपये की जमीन के मामले में इसी तरह के गिफ्ट डीड और फर्जी मालिकों का उपयोग कर लेनदेन किया गया, जिसका खुलासा होने के बाद सिटी चौक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।
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प्रशासन की कार्रवाई और चेतावनी
पिछले एक साल में इस तरह के चार बड़े मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें बोगस आधार कार्ड और जाली दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी की गई है। तत्कालीन जिलाधिकारियों ने इसके लिए एक जांच समिति भी नियुक्त की थी। मुद्रांक अधीक्षक विजय भालेराव ने बताया कि मंत्रालय स्तर पर बैठकों का दौर जारी है ताकि रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा सके और ऐसे घोटालों पर लगाम लगाई जा सके।
यह खबर उन सभी जमीन मालिकों के लिए एक चेतावनी है जो अपनी संपत्ति से दूर रहते हैं। प्रशासन ने सलाह दी है कि अपनी जमीनों के रिकॉर्ड समय-समय पर जांचते रहें और सुनिश्चित करें कि आपका आधार और सरकारी रिकॉर्ड सुरक्षित है। दलालों और भ्रष्ट अधिकारियों की इस साखली ने यह साबित कर दिया है कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही करोड़ों की चपत लगा सकती है।
