केंद्रों पर फेडरेशन की 'हिटलरशाही'! (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Bhandara Paddy Purchase: हर वर्ष दिवाली से पहले शुरू होने वाली धान खरीद प्रक्रिया इस वर्ष दिवाली बीत जाने के बाद भी शुरू नहीं हो सकी है, जिससे किसानों में भारी चिंता फैल गई है। शासन के निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन सातबारा पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए थी, लेकिन मार्केटिंग फेडरेशन की कथित मनमानी और ‘हिटलरशाही’ नीतियों के चलते पूरा पोर्टल बंद पड़ा है।
अब तक एक भी किसान का पंजीकरण नहीं हो सका है और आधिकारिक धान खरीद प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। किसानों की परेशानी देखते हुए कई संस्थाएं धान की गिनती कर संग्रहण कर रही हैं, किंतु पंजीकरण प्रक्रिया बंद रहने से किसान एक बार फिर दलालों और निजी व्यापारियों के चंगुल में फंसने को मजबूर हो रहे हैं।
पिछले कई वर्षों से शासन ने किसानों के हित में जिले में सैकड़ों धान खरीद केंद्र शुरू किए थे। ‘ब’ वर्ग सुशिक्षित बेरोजगार सेवा सहकारी संस्थाओं को धान खरीद की अनुमति देकर किसानों को बड़ी राहत मिली थी। लेकिन इस वर्ष मार्केटिंग फेडरेशन ने नया आदेश जारी करते हुए संस्थाओं को 10 लाख रुपये की जगह 25 लाख रुपये अमानत राशि जमा करने की अनिवार्य शर्त लागू कर दी है। इसके अलावा 5,000 क्विंटल से अधिक धान खरीदने पर प्रतिबंध भी लगाया गया है। यह निर्णय छोटी और बेरोजगार सेवा सहकारी संस्थाओं के लिए अस्तित्व का बड़ा संकट बन गया है।
भंडारा जिले की 236 संस्थाएं वर्ष 2022-23 से पारदर्शी पद्धति से धान खरीद का कार्य कर रही हैं। लेकिन पिछले छह वर्षों से शासन पर 25 करोड़ रुपये कमिशन और गोदाम किराया का भुगतान लंबित है। इनमें से 14.58 करोड़ रुपये का गोदाम किराया भी अब तक जारी नहीं हुआ है, जिससे कई संस्थाओं को कार्यालय खर्च चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। इसके बावजूद संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभा रही हैं।
एक ओर शासन किसान हित में योजनाएं लागू कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मार्केटिंग फेडरेशन की कठोर नीतियां किसानों और संस्थाओं दोनों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान कर रही हैं। ऑनलाइन पंजीकरण बंद, कठोर शर्तें और भुगतान में विलंब के कारण किसान संकट में फंस गए हैं। किसान, जिन्हें अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है, आज फेडरेशन की ‘फाइल’ और ‘फतवों’ के बीच पिस रहे हैं।
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किसान एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने शासन से इस मुद्दे में तत्काल दखल देने और फेडरेशन की एकाधिकारवादी नीतियों पर लगाम लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्थिति ऐसे ही बनी रही, तो यह फतवा न केवल किसानों बल्कि पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित होगा।
धान खरीद संघ अध्यक्ष डॉ. नेपाल रंगारी ने कहा कि पिछले चार वर्षों से ‘ब’ वर्ग की सहकारी संस्थाएं खरीफ और रबी सीजन में धान की शत-प्रतिशत खरीदी पारदर्शी तरीके से कर रही हैं। नियमों के अनुसार फेडरेशन को दो महीनों के भीतर धान का उठाव करना चाहिए, लेकिन छह-छह महीने की देरी हो रही है, जिससे संस्थाओं को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। ऐसे समय में अमानत राशि 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करना पूरी तरह अन्याय है। जब तक यह शर्त रद्द नहीं की जाएगी, तब तक संस्थाएं धान खरीदी शुरू नहीं करेंगी, ऐसा स्पष्ट इशारा उन्होंने किया है।
भंडारा जिला धान खरीद संघ की ओर से लंबित कमिशन, गोदाम किराया और 25 लाख रुपये अमानत राशि शर्त के विरोध में विधान परिषद सदस्य डॉ. परिणय फुके को ज्ञापन सौंपा गया। डॉ. फुके ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर संस्थाओं का लंबित कमिशन और गोदाम किराया तत्काल जारी करने तथा अमानत राशि की कठोर शर्त रद्द करने की मांग की है। वे इस मुद्दे पर लगातार अनुपालन कर रहे हैं ताकि किसानों और सहकारी संस्थाओं को शीघ्र राहत मिल सके।