पुणे जिले में प्रशासनिक तैयारियाँ तेज उपजिलाधिकारी ज्योति कदम फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Digital Census India News: देश के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक और जनसांख्यिकीय अभियानों में से एक ‘जनगणना 2027’ को लेकर पुणे जिले में हलचल तेज हो गई है। जिले के प्रशासनिक ढांचे ने इस विशाल कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए अपनी कमर कस ली है। सोमवार को निवासी उपजिलाधिकारी एवं जिला जनगणना अधिकारी ज्योति कदम की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के साथ ही इस अभियान का औपचारिक बिगुल बज गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में जिले के सभी तहसीलदार, नगर परिषदों के मुख्याधिकारी और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता रही, जिसमें आगामी जनगणना के क्रियान्वयन के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया गया।
इस बार की जनगणना इतिहास के पन्नों में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाली है क्योंकि यह पूरी तरह से डिजिटल स्वरूप में आयोजित की जाएगी। ‘हाउस लिस्टिंग’ यानी घरेलू सूचीकरण के पहले चरण पर चर्चा करते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक कागजी कार्य प्रणाली को त्याग कर अब डिजिटल उपकरणों के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा। इस तकनीक के उपयोग का मुख्य उद्देश्य डेटा में अधिकतम सटीकता, पारदर्शिता और गति लाना है। डिजिटल साधनों के प्रभावी इस्तेमाल और प्रगणकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई, ताकि तकनीकी बाधाओं को समय रहते दूर किया जा सके और एक सुव्यवस्थित तंत्र के जरिए जानकारी एकत्र की जा सके।
पुणे जिले के लिए यह जनगणना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले एक दशक में यहां शहरीकरण की रफ्तार अभूतपूर्व रही है। नए रिहायशी इलाकों का विस्तार और भौगोलिक सीमाओं में आए बदलावों को देखते हुए पुणे जिला जनगणना अधिकारी ज्योति कदम ने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नई हाउसिंग सोसायटियों और वसाहतों की अचूक मैपिंग करने, शिक्षा और रोजगार की तलाश में पुणे आने वाले प्रवासी परिवारों का डेटा संकलित करने को प्राथमिकता देने के साथ ही यह बी सख्त निर्देश दिए कि डेटा संकलन में कोई भी व्यक्ति या परिवार गणना से न छूटे। इसके लिए जमीनी स्तर पर डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन यानी भौतिक पड़ताल अनिवार्य होगी।
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उपजिलाधिकारी ज्योति कदम ने बताया की पुणे प्रशासन द्वारा समय से पहले की गई ये तैयारियाँ निश्चित रूप से एक मिसाल कायम करेंगी। नई सोसायटियों की सटीक मैपिंग तथा प्रवासियों के डेटा संकलन में बरती गई सावधानी इस राष्ट्रीय स्तर के कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी। डिजिटल पद्धति से होने वाली इस जनगणना से प्राप्त आंकड़े भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी, समावेशी और सटीक बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।