Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

भंडारा में बूंद-बूंद को तरसेंगे लोग, मार्च में ही रेगिस्तान बनीं नदियां, 1.5 मीटर नीचे गिरा पाताल का पानी

Bhandara Water Scarcity: भंडारा में जल प्रलय की आहट! मार्च में ही सूखी सूर और चुलबंद नदियां। भूजल स्तर 1.5 मीटर गिरा; रेत तस्करी और ग्रीष्मकालीन धान ने सोख लिया जमीन का पानी।

  • Written By: प्रिया जैस
Updated On: Mar 20, 2026 | 12:56 PM

नदी बने रेगिस्तान (सौजन्य-नवभारत)

Follow Us
Close
Follow Us:

Ground Water Survey Bhandara: भंडारा जिले में भीषण गर्मी की आधिकारिक शुरुआत से पहले ही पानी की किल्लत का साया गहराने लगा है। मार्च महीने के मध्य में ही जिले की सूर और चुलबंद जैसी महत्वपूर्ण नदियां पूरी तरह सूख चुकी हैं और अब इन नदी पात्रों ने रेगिस्तान का स्वरूप धारण कर लिया है।

धान फसल के लिए अधिक पानी, रेत तस्करी

पिछले मानसून में संतोषजनक बारिश होने के बावजूद, गर्मी के धान के लिए पानी के बेतहाशा उपयोग और अवैध रेत तस्करी के कारण भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया है। यह स्थिति आने वाले अप्रैल और मई के महीनों में जिले के लिए बड़े खतरे का संकेत दे रही है। भंडारा जिला प्राकृतिक रूप से जल संसाधनों से समृद्ध माना जाता है, लेकिन इस बार मार्च में ही नदियों की स्थिति चिंताजनक हो गई है।

जिले की जीवनदायीनी कही जाने वाली वैनगंगा नदी का प्रवाह भी गोसीखुर्द बांध के बाहरी क्षेत्रों में काफी धीमा पड़ गया है। कई जगहों पर केवल रेत के ढेर और छोटे गड्ढे ही दिखाई दे रहे हैं। तुमसर और मोहाडी तहसील से बहने वाली सूर नदी तथा साकोली व लाखांदुर की चुलबंद नदी का तल पूरी तरह उघड़ चुका है। नदियों के सूखने से उन पर आधारित ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं भी संकट में पड़ गई हैं, जिससे कई गांवों में प्यास बुझाने का संघर्ष शुरू हो गया है।

सम्बंधित ख़बरें

गुढ़ीपाड़वा पर विदर्भ में 700 करोड़ का व्यापार, सराफा और ऑटोमोबाइल में रिकॉर्ड तोड़ बिक्री

नागपुर में ‘एक्सप्रेसवे’ के नाम पर 5 करोड़ की चपत! दिल्ली का शातिर ठग अजय कुमार मुंबई से गिरफ्तार

भटाली खदान हादसे के बाद दिल्ली तक हड़कंप, 2 महीने पहले दी थी चेतावनी, फिर भी जोखिम में डाली 4 कर्मियों की जान

कैसे हुई IIT बॉम्बे के 3 छात्रों की मौत? मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे हादसे पर पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

भूजल स्तर में भारी गिरावट

भूजल सर्वेक्षण विभाग के आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जिले की 74 निरीक्षण कुओं के माध्यम से की गई जांच में पता चला है कि पिछले 5 वर्षों के औसत की तुलना में भूजल स्तर 0.50 से 1.5 मीटर तक नीचे चला गया है। विशेष रूप से लाखांदुर, साकोली और मोहाडी तहसील इस गिरावट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के दौरान रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की अनदेखी और बोरवेल के बढ़ते अनियंत्रित इस्तेमाल ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। इसके साथ ही, जिले के 33 रेत घाटों पर होने वाले अवैध उत्खनन ने जमीन की जल संचयन की प्राकृतिक क्षमता को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे वॉटर रिचार्ज की प्रक्रिया बाधित हुई है।

  • सूख चुकी प्रमुख नदियां सूर, चुलबंद
  • प्रभावित प्रमुख नदी: वैनगंगा (प्रवाह धीमा)
  • भूजल स्तर में गिरावट: 0.50 से 1.5 मीटर
  • जांच किए गए निरीक्षण कुएं 74
  • सबसे प्रभावित तहसील: लाखांदुर, साकोली, मोहाडी

संकट के कारण

  • ग्रीष्मकालीन धान के लिए अत्यधिक पानी उपयोग
  • अवैध रेत उत्खनन
  • रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की अनदेखी
  • बोरवेल का अनियंत्रित उपयोग

जमीनी तस्वीर

  • नदी तल में रेत के ढेर और गड्ढेट
  • सूखी नदी में तरबूज-खरबूज की खेती

यह भी पढ़ें – मोदी कैबिनेट में महाराष्ट्र से नए चेहरे..प्रफुल को सुनेत्रा को मनाने का इनाम, जूनियर शिंदे का भी होगा प्रमोशन!

…पानी का सदयोग करें

धान की ग्रीष्मकालीन खेती और बढ़ते निर्माण कार्यों के लिए पानी का बेहिसाब इस्तेमाल हमारे भूजल भंडार को तेजी से खत्म कर रहा है। यदि समय रहते जल संरक्षण के ठोस उपाय नहीं किए गए और नागरिक पानी के किफायती उपयोग पर ध्यान नहीं देंगे, तो आने वाले महीनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं का जलस्तर भी काफी नीचे जा चुका है, जिससे नागरिकों में अभी से टैंकर पर निर्भर होने की नौबत आने का डर समा गया है।

  • डॉ. योगेंद्रप्रसाद दुबे, वरिष्ठ भूवैज्ञानिक

पशुधन और वन्यजीवों पर संकट

नदियों और नालों के सूखने का सबसे बुरा असर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन पर पड़ रहा है। चारे और पानी की कमी के कारण मवेशियों के सामने जीवन का संकट खड़ा हो गया है। वहीं, जंगलों के प्राकृतिक जल स्रोत सूखने से वन्यजीवों के भी पानी की तलाश में मानवीय बस्तियों की ओर आने का खतरा बढ़ गया है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

दूसरी ओर, नदियों के सूखे पात्रों में अब बड़े पैमाने पर तरबूज और खरबूजे की खेती की जा रही है। हालांकि यह स्थानीय किसानों के लिए आय का साधन है, लेकिन यह इस कड़वे सच का प्रमाण भी है कि नदियों की मुख्य धारा अब लुप्त होने के कगार पर है।

Bhandara water crisis rivers dry up groundwater level drop 1 5m

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Mar 20, 2026 | 12:56 PM

Topics:  

  • Bhandara
  • Bhandara News
  • Maharashtra

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.