भंडारा में चरम पर मानव-वन्यजीव संघर्ष: 8 महीनों में 7.33 करोड़ नुकसान, 6,400 घटनाओं से दहशत

Bhandara Wildlife Attacks: भंडारा जिले में वन्यजीवों के हमलों से 7.33 करोड़ की क्षति हुई है। 6,417 घटनाओं में फसल बर्बादी, पशुधन हानि और जनहानि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण इलाकों में भारी दहशत है।
Human-wildlife conflict in Bhandara has caused losses over 7.33 crore. With 6,417 incidents of crop and livestock damage, villagers living near tiger reserves are in constant fear.
Tiger Attacks Bhandara (फोटो- सोशल मीडिया)
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Wildlife Compensation Maharashtra News: भंडारा जहां वन्यजीव संरक्षण को लेकर चर्चाएं हो रही हैं, वहीं जिले में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ता संघर्ष गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। घने जंगलों तथा विभिन्न टाइगर रिजर्व क्षेत्रों से घिरे होने के कारण जिले के किसान और ग्रामीण भय के साए में जीवन जीने को मजबूर हैं। पिछले कुछ महीनों में वन्यजीवों के हमलों और फसल नुकसान के कारण 7 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक की क्षति दर्ज की गई है।

जिले में बाघ, तेंदुआ, जंगली सूअरों आदि की बढ़ती संख्या के चलते वन्यजीवों का मानव बस्तियों की ओर लगातार आवागमन बढ़ा है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष चरम पर पहुंच गया है। 1 अप्रैल 2025 से अब तक जिले में वन्यजीव हमलों से जुड़ी 6,417 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें शासन को 7 करोड़ 33 लाख 76 हजार 451 रुपये की क्षतिपूर्ति देनी पड़ी है।

भंडारा जिला चारों ओर से प्रमुख वन एवं व्याघ्र परियोजनाओं से घिरा हुआ है। पूर्व दिशा में नवेगांव-नागझिरा, उत्तर में पेंच, पश्चिम में उमरेड-करहांडला-पवनी तथा दक्षिण में ताडोबा और ब्रह्मपुरी वन क्षेत्र होने से बाघों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। जंगलों में शिकार की कमी और सीमित आवास के कारण वन्यजीव मानव क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। फसलों को बचाने के लिए किसानों द्वारा लगाए जाने वाले विद्युत तार कई बार वन्यजीवों के लिए घातक साबित हो रहे हैं। हाल ही में जंगली सूअरों की तस्करी करने वाले गिरोह की गिरफ्तारी ने वन्यजीव सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा की है।

नुकसान और जनहानि

पिछले सात आठ महीनों में वन्यजीव हमलों में दो लोगों की मृत्यु तथा 42 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतकों के परिजनों को लगभग 50 लाख रुपये तथा घायलों के उपचार हेतु 25 लाख 65 हजार 747 रुपये की सहायता दी गई है। इसके अलावा 814 पशुधन वन्यजीव हमलों का शिकार हुए, जिसके लिए 1 करोड़ 22 लाख 99 हजार 564 रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई, जंगली सूअरों से खेती को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। 5,559 मामलों में 5 करोड़ 35 लाख 11 हजार 140 रुपये की फसल हानि दर्ज की गई है।

जंगलों की आग बन रही खतरा

पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में जंगलों में लगी 109 आग की घटनाओं से लगभग 221.714 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ था। इस वर्ष 2,809 किलोमीटर फायर लाइन का प्रस्ताव तैयार किया गया, लेकिन केवल 1,000 किलोमीटर को ही मंजूरी मिल सकी है। वनाग्नि नियंत्रण के लिए वन विभाग ने 232 फायर ब्लोअर, 50 प्रशिक्षित अग्निरक्षक, 18 निगरानी टावर तथा 10 नियंत्रण कक्ष स्थापित किए है,

नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल

वन्यजीवों की लगातार मौजूदगी के कारण ग्रामीण्णो के लिए दिन के समय खेतों में जाना भी जोखिम भरा हो गया है। किसानों ने मांग की है कि केवल मुआवजा देने के बजाय सौर फेसिंग, सुरक्षा दीवार और स्थायी संरक्षण उपाय लागू किए जाएं, विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों का मानना है कि केवल संरक्षण की घोषणाएं पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

श्रेणी घटनाओं की संख्या दी गई क्षतिपूर्ति (अनुमानित)
फसल नुकसान (मुख्यतः सूअर) 5,559 ₹5,35,11,140
पशुधन हानि (बाघ/तेंदुआ) 814 ₹1,22,99,564
जनहानि (मृत्यु) 02 ₹50,00,000
घायल व्यक्ति 42 ₹25,65,747
कुल योग 6,417 ₹7,33,76,451
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