भंडारा में आरटीओ कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, सभी सेवाएं ठप
RTO Office Closed: भंडारा में मोटर वाहन विभाग (आरटीओ) कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर 16 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। जिससे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Indefinite Strike (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Bhandara RTO Strike: मोटर वाहन विभाग के कर्मचारियों ने अपनी लंबित और न्यायोचित मांगों को लेकर राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। 9 जून 2026 को किए गए एक दिवसीय सांकेतिक आंदोलन के बाद भी सरकार और प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने से कर्मचारियों ने 16 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। इसके चलते भंडारा क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारी संगठन का कहना है कि पिछले कई महीनों से वे अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती गई। 9 जून को शांतिपूर्ण ढंग से सांकेतिक हड़ताल करने के बावजूद कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, जिसके बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन का निर्णय लेना पड़ा। कर्मचारी संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
नागरिकों को बिना काम लौटना पड़ा
संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन केवल आश्वासन नहीं बल्कि मांगों का वास्तविक समाधान चाहते हैं। हड़ताल के कारण आरटीओ कार्यालय में नए वाहनों का पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस परीक्षण, फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करना, वाहन कर जमा करना तथा अन्य आवश्यक सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। दूर-दराज से आने वाले वाहनधारकों को बिना काम कराए वापस लौटना पड़ रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
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कर्मचारी संगठन की प्रमुख मांगें
कर्मचारी भर्ती एवं सेवा नियमावली तत्काल जारी की जाए। प्रशासनिक सुधारों के लिए स्वीकृत संगठनात्मक ढांचा (आकृतिबंध) लागू किया जाए। वापस ली गई 56 कर्मचारियों की पदोन्नति बहाल की जाए। लंबित प्रशासनिक पदोन्नतियों को तत्काल मंजूरी दी जाए। पदोन्नति से पहले लागू की गई नियमविरुद्ध परीक्षा को रद्द किया जाए।
10-20-30 वर्ष की समयबद्ध सेवा के आर्थिक लाभ तत्काल लागू किए जाएं। कर्मचारियों के पदनामों में आवश्यक संशोधन किए जाएं। अब पूरे जिले की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और कर्मचारी संगठन के बीच कब सहमति बनती है और आम नागरिकों को हो रही परेशानी से कब राहत मिलती है।
