दीपक तले अंधेरा, स्वास्थ्य राज्य मंत्री के क्षेत्र में चटाई पर हो रहा इलाज, रोहित पवार ने साझा की मार्मिक फोटो
Parbhani Jintur Medical Crisis Meghna Bordikar Rohit Pawar: परभणी के पिंपराला गांव में दूषित पानी से 70 लोग बीमार; मंदिर के सामने चटाई पर इलाज की तस्वीरों से महाराष्ट्र में सियासी बवाल।
- Written By: अनिल सिंह
स्वास्थ्य राज्य मंत्री के क्षेत्र में चटाई पर हुआ मरीजों का इलाज (फोटो क्रेडिट-X)
Parbhani Jintur Medical Crisis: महाराष्ट्र के परभणी जिले के जिंतूर तालुका स्थित पिंपराला गांव से सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक बेहद चौंकाने वाली और मार्मिक तस्वीर सामने आई है। गांव में फैले संदिग्ध डायरिया (दस्त और पेट दर्द) के प्रकोप के बाद बुनियादी चिकित्सा बुनियादी ढांचे के अभाव में मरीजों का इलाज गांव के ही एक मंदिर के सामने जमीन पर चटाई बिछाकर किया गया। इस पूरी घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के कद्दावर विधायक रोहित पवार ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है।
रोहित पवार ने इस दुर्दशा को ‘दीपक तले अंधेरा’ करार देते हुए सीधे तौर पर क्षेत्र की स्थानीय विधायक और वर्तमान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री व परभणी की पालक मंत्री मेघना बोर्डीकर पर तीखा हमला बोला है।
पाणीपुरवठा आणि आरोग्य राज्यमंत्री मेघनाताई बोर्डीकर यांच्या मतदारसंघातील आणि त्यांच्या जिंतूर शहरापासून 5 km अंतरावर असलेलं संपूर्ण आदिवासी पिंप्राळा गाव अतिसाराने बेजार असून या रुग्णांवर गावात अंगणातच उपचार करण्यात येत आहेत. रुग्णांना लावण्यासाठी दोरीवर टांगलेले हे केवळ सलाईन… pic.twitter.com/8bON35hrvg — Rohit Pawar (@RRPSpeaks) June 16, 2026
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कुएं का दूषित पानी पीने से 70 लोग बीमार
यह पूरा गंभीर मामला जिंतूर के पिंपराला गांव में शुक्रवार, 13 जून 2026 से शुरू हुआ, जहां अचानक पुरुष, महिलाएं और बच्चे बड़े पैमाने पर दस्त और पेट दर्द की गंभीर समस्या से पीड़ित होने लगे। शुरुआत में गांव की स्थानीय आशा कार्यकर्ता अंजना दखोरे ने सभी पीड़ितों को प्राथमिक उपचार के तौर पर ओआरएस और कुछ जरूरी दवाइयां वितरित कीं, लेकिन बीमारी के तीव्र प्रकोप के आगे वे बेअसर साबित हुईं। देखते ही देखते पिछले चार दिनों के भीतर गांव के लगभग 65 से 70 नागरिक इस बीमारी की चपेट में आ गए। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि ग्रामीणों द्वारा गांव के ही एक सार्वजनिक कुएं का दूषित पानी पीने की वजह से यह जल जनित बीमारी फैली है, जिसके बाद पानी के सैंपल जांच प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
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जमीन पर बिछी चटाई, स्वास्थ्य कर्मियों ने वहीं टांग दी स्लाइन
गांव में मेडिकल इमरजेंसी जैसे हालात पैदा होने के बाद चरथाना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विवेकानंद खंडे अपनी पूरी टीम, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ एम्बुलेंस लेकर गांव पहुंचे। हालांकि, गांव में उचित उप-केंद्र या चिकित्सा कक्ष न होने के कारण डॉक्टरों को स्थानीय हनुमान मंदिर के सामने ही मोर्चा संभालना पड़ा। स्वास्थ्य कर्मियों ने मंदिर के सामने जमीन पर चटाई बिछाई और लगभग 20 से 25 पीड़ित महिलाओं को वहीं लेटाकर स्लाइन चढ़ाना और इंजेक्शन देना शुरू कर दिया। खुले आसमान और जमीन पर इलाज का यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, प्रशासन में हड़कंप मच गया। हालांकि, डॉक्टरों ने सफाई दी है कि मरीजों की गंभीर हालत और उनके ही अनुरोध पर तुरंत राहत देने के लिए गांव में यह अस्थाई व्यवस्था की गई थी, जिसके बाद गंभीर मरीजों को चरथाना स्वास्थ्य केंद्र स्थानांतरित कर दिया गया।
बीजेपी का पलटवार- ‘यह जिला परिषद सीट तो एनसीपी की है’
इस अमानवीय दृश्य को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में भारी बयानबाजी शुरू हो गई है। विधायक रोहित पवार ने पिंपराला गांव में चटाई पर लेटे मरीजों को स्लाइन चढ़ाने की मार्मिक तस्वीरें अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा करते हुए लिखा कि यह बेहद शर्मनाक है कि जो जिला खुद स्वास्थ्य राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर का निर्वाचन क्षेत्र है, वहां के नागरिकों को इस तरह का इलाज मिल रहा है। इस तीखे हमले के बाद बीजेपी पदाधिकारियों ने भी तुरंत रक्षात्मक और राजनीतिक रुख अपनाते हुए पलटवार किया है। बीजेपी का दावा है कि जिस पिंपराला गांव में यह घटना हुई है, वह जिला परिषद सर्कल (सर्किल क्षेत्र) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के निर्वाचित सदस्य के अंतर्गत आता है, इसलिए स्थानीय विकास की जिम्मेदारी उनकी थी। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच स्वास्थ्य राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर ने अभी तक मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
