1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का दावा, चंद्रपुर में नहीं पहुंची एम्बुलेंस, घर में हुए प्रसव के बाद महिला की मौत

Chandrapur Pregnant Woman Dies Due To Bad Roads: चंद्रपुर जिले के घोडनकप्पी गांव में खराब सड़क के कारण समय पर एम्बुलेंस न पहुंचने से प्रसूता संगीता गेदम की मौत।
Chandrapur Pregnant Woman Death
नवजात को जन्म देते ही मां की मौत (फोटो क्रेडिट-X)
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Chandrapur Pregnant Woman Death: एक तरफ जहां देश को महाशक्ति बनाने, डिजिटल इंडिया और महाराष्ट्र को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में बदलने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चंद्रपुर और गढ़चिरोली जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की जमीनी हकीकत आज भी रोंगटे खड़े कर देने वाली है। बुनियादी ढांचे और पक्की सड़कों के अभाव में आज भी सुदूर ग्रामीण इलाकों के नागरिक तड़प-तड़प कर दम तोड़ने को मजबूर हैं।

ऐसा ही एक बेहद दर्दनाक और दुर्भाग्यपूर्ण मामला चंद्रपुर जिले से सामने आया है, जहां खराब सड़क के चलते समय पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण बच्चे को जन्म देते ही एक 25 वर्षीय आदिवासी महिला की मौत हो गई। मृतक महिला की पहचान संगीता गेदम के रूप में हुई है। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और ग्रामीण विकास के दावों की पोल खोल कर रख दी है।

एम्बुलेंस के लिए नहीं है कोई पक्की सड़क

यह पूरी घटना चंद्रपुर जिले के जीवाती तालुका के अंतर्गत आने वाले सुदूर गांव घोडनकप्पी में घटित हुई। तेलंगाना सीमा के बेहद करीब स्थित इस पहाड़ी और जंगली गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, संगीता गेदम को गर्भावस्था के आठवें महीने में ही अचानक प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) शुरू हो गई। गांव की कनेक्टिविटी न होने के कारण परिजनों ने आनन-फानन में घर पर ही उसका प्रसव कराया, जहां उसने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। लेकिन प्रसव के तुरंत बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होने लगा, जिससे उसकी हालत बिगड़ने लगी।

गड्ढों में फंसी रही एम्बुलेंस, तड़प-तड़प कर प्रसूता ने तोड़ा दम

स्थिति गंभीर होते देख परिजनों ने तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी और आपातकालीन सरकारी एम्बुलेंस सेवा को कॉल किया। डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी एम्बुलेंस लेकर रवाना भी हुए, लेकिन घोडनकप्पी गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क इतनी बदतर, संकरी और गड्ढों से भरी थी कि एम्बुलेंस गांव के भीतर प्रवेश ही नहीं कर सकी। जब तक स्वास्थ्य कर्मी अन्य वैकल्पिक साधनों से पैदल या अन्य तरीके से पीड़ित महिला तक पहुंचने का प्रयास करते, तब तक समय पर सही इलाज न मिल पाने के कारण अत्यधिक खून बह जाने से संगीता गेदम ने दम तोड़ दिया।

महिला को पाटन स्वास्थ्य केंद्र आने की दी गई थी सलाह

इस दुखद घटना के बाद जब प्रशासनिक अमले पर सवाल उठने शुरू हुए, तो जिला स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तरफ से आधिकारिक सफाई पेश की है। स्वास्थ्य प्रशासन के अनुसार, विभाग की ओर से महिला की नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच की जा रही थी। चूंकि घोडनकप्पी गांव में पक्की सड़क की गंभीर समस्या है, इसलिए आशा वर्कर और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने संगीता को प्रसव के अनुमानित समय से पहले ही पाटन के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में शिफ्ट होने या अपने मायके चले जाने की तत्परता दिखाई थी, जहां सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त थीं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि महिला ने स्वयं वहां रहने से मना कर दिया था और आठवें महीने में अचानक समय से पहले प्रसव होने के कारण यह हादसा हो गया।

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