भंडारा में बदहाल सड़क व्यवस्था, पाइपलाइन कार्य के बाद भी नहीं हुई मरम्मत
Pothole Roads Bhandara: भंडारा शहर में पाइपलाइन और गटर कार्य के बाद सड़कों की मरम्मत न होने से जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है और जनता परेशान है।
Road Maintenance Issue (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Bhandara Road Problem: भंडारा शहर इन दिनों बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक अनदेखी के कारण बदहाली के आंसू रो रहा है। पूरा शहर मानों गड्ढों के मलबे में तब्दील हो चुका है। आलम यह है कि शहर के मुख्य मार्गों से लेकर रिहाइशी इलाकों की गलियों तक, हर तरफ सिर्फ और सिर्फ गड्ढे ही नजर आ रहे हैं। सालों पहले बनी पक्की सड़कें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं, लेकिन उनके स्थान पर नई सड़कों का निर्माण अधर में लटका हुआ है।
शहर की इस दुर्दशा को दोगुना करने में जलापूर्ति योजना और गटर लाइन बिछाने के कार्यों ने मुख्य भूमिका निभाई है। पाइपलाइन बिछाने के नाम पर पूरे शहर को जगह-जगह से खोद दिया गया। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि इन गड्ढों को तकनीकी रूप से सही तरीके से भरने के बजाय, केवल मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी गई।
भंडारा शहर की सड़कें टूटी
हल्का भराव होने के कारण मौजूदा बारिश के मौसम में यह सड़कें लगातार धंस रही हैं, जिससे वाहनों का चलना दूभर हो गया है। हाल ही में शहर के भीतर एक बड़ा हादसा होते होते टला, जब एक ट्रैक्टर पाइपलाइन के लिए खोदे गए इसी तरह के एक कमजोर गड्ढे में फंस गया।
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ट्रैक्टर का एक पहिया पूरी तरह जमीन में धंस गया। इसके अलावा, खामतालाब रोड़ पर भी एक गड्ढे की वजह से बाइक सवार का संतुलन बिगड़ गया और वह बीच सड़क पर गिरकर चोटिल हो गया। इस तरह की दुर्घटनाएं अब भंडारा वासियों के लिए रोजमर्रा की बात बन चुकी हैं, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश है।
वाहन चालकों के लिए बढ़ा खतरा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इन गड्ढों की उचित मरम्मत और सड़कों का डामरीकरण नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी जानलेवा दुर्घटना घटित हो सकती है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के साथसाथ पैदल चलने वाले राहगीरों को भी अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।
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सड़कों की जिम्मेदारी कौन उठाएइस पूरी अव्यवस्था ने अब राजनीतिक मोर्चे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि जब नगर परिषद में प्रशासक राज था, तब लोगों को ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं। लेकिन अब नगर परिषद में जिस दल की सत्ता है, उसी की सरकार राज्य और केंद्र में भी है।
ट्रिपल इंजन की इस व्यवस्था से नागरिकों को उम्मीद थी कि भंडारा को एक सुंदर और गड्ढामुक्त शहर बनाया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत देखकर आम जनता की उम्मीदें पूरी तरह टूट चुकी हैं। लोग अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि इन अधूरी परियोजनाओं और जानलेवा सड़कों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
