चंद्रपुर मनपा चुनाव के 6 माह बाद भी विकास ठप, नेताओं की लड़ाई कोर्ट पहुंची; बुनियादी सुविधाओं को तरसी जनता

Chandrapur News: चंद्रपुर मनपा में चुनाव के छह महीने बाद भी विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं। बीजेपी के दो गुटों की आपसी खींचतान और राजनीतिक ड्रामे से शहर की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान है।
Six months after the Chandrapur civic polls, development remains stalled due to intense political infighting within BJP factions, leaving residents without basic amenities.
चंद्रपुर मनपा (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Chandrapur Municipal Corporation: चंद्रपुर शहर महानगर पालिका में लंबे समय बाद चुनाव हुए। चुनाव के बाद सत्ता आयी। इस सत्ता से विकास का घोड़ा तेज गति से भागेगा, ऐसी उम्मीद आम मतदाताओं को थी। परंतु आधा साल बीत गया है और इस उम्मीद पर पानी फिरने की बात हाल की गतिविधियों से सामने आ रही है। इससे जनता में सत्ता और विपक्ष दोनों गुट के नेता व पार्षदों के प्रति तीव्र असंतोष व्याप्त है। चंद्रपुर में नगर पालिका की स्थापना आजादी पूर्व 1867 में ही हो चुकी थी। 2011 में नप भंग कर महानगर पालिका का दर्जा मिला था। चंद्रपुर शहर महानगर पालिका डी श्रेणी में आती है। यहां की आबादी करीब साढ़े 4 लाख है। इस ऐतिहासिक शहर में मनपा का चुनाव बीते 15 जनवरी को हुए थे।

16 जनवरी को मतगणना हुई थी। शिवसेना यूबीटी के अप्रत्याशित समर्थन से भाजपा ने सत्ता बनाई। 10 फरवरी को भाजपा के विधायक सुधीर मुनगंटीवार गुट की संगीता खांडेकर महापौर चुनी गयी थी। 16 मार्च को शिवसेना यूबीटी की मनस्वी गिहें स्थायी समिति सभापति चुनी गई थी। इसके बाद विकास के कार्य रफ्तार पकड़ेंगे, ऐसा माना जा रहा था। परंतु विभिन्न समितियों के बंटवारे के साथ हाल के मनोनीत सदस्य चयन को लेकर आपसी दलीय विवाद अदालत तक पहुंचे। जिससे विकास का

बंटाधार हो गया।

66 प्रभागों की जनता हाशिए पर चंद्रपुर शहर में 66 प्रभाग हैं। यहां की जनता को बुनियादी सुविधाएं व ढांचागत विकास मिले इसलिए इतने ही नगरसेवक चुन कर दिये गए हैं। पंरतु शहर के अधिकांश वार्डों में विविध समस्याओं का अंबार लगा है। साफ सफाई, जलापूर्ति, अंतर्गत सड़कें, मानव संसाधन का टोटा, सीवरेज की समस्या से शहर की जनता हलाकान है। क्या इसके लिए ही हमने पार्षदों को चुन कर दिया? ऐसा सवाल अब संतप्त लोगों की जुबान पर है।

हवा हो गई जनता की फिक्र

चंद्रपुर मनपा के पार्षद अपने आंकाओं के इशारों पर राजनीतिक नौटंकी में व्यस्त है। गुटनेता पद बरकरार रहे, इसलिए कांग्रेस के पदाधिकारी अदालत तक पहुंचे हैं। इस नौटकी में जो शामिल है, उनके वाहों की हालत नाजुक है। कई समस्याओं से जूझते लोग अब इन नौटंकीबाज नेताओं को कोस रहे हैं।

भाजपा बनाम भाजपा ने बिगाड़ा खेल

2 और 3 जुलाई को चंद्रपुर मनपा आयुक्त कार्यालय व मनपा के प्रांगण में जो हाईवोल्टेज ड्रामा हुआ, उसे लोग कभी भुला नहीं पाएंगे। मनपा की आमसभा क्यों रद्द हुई? इस सवाल को लेकर भाजपा के विधायक किशोर जोरगेवार गुट व विधायक सुधीर मुनगंटीवार गुट के नेता आपस में भिड़ गए। बातों बातों में हाथ मुक्के भी चल पड़े। स्वीकृत सदस्य बनने की लालसा रखने वाले इस खेल के धुरंधर बताए जाते हैं। इसमें जनता को कोई लेना देना नहीं है, ऐसा मतदाता नागरिकों का कहना है। बताया जाता है कि इसी वजह से सत्ता में बैठी भाजपा विकास की राह पर अब तक एक इंच भी नहीं चल पाई है।

बदहाल हो गया शहर

किशोर खेलकर ने बाताया की इन पार्षदों के आपसी खींचातानी के कारण शहर बदसूरत हो गया है। नालियां लबालब हैं। मच्छरों का प्रकोप हो गया है। साफ सफाई फोटो में भी नजर नहीं आती। अंदरुनी सड़कों से हादसे हो रहे हैं। प्रशासन मौन है। दूसरी पार्टियां भी जनहित में सामने नहीं आ पाई, यह दुर्भाग्य नहीं तो क्या है? बाबूपेठ प्रभाग 17 में जलभराव हो गया है। राजीव गांधी नगर, जलनगर समेत कई भागों में जलसंकट बरकरार है।

तो विकल्प तलाशेंगे लोग

सामाजिक चंदन पॉल कार्यकर्ता ने बाताया की फिलहाल मनपा में अफरा-तफरी का माहौल है। आधा साल बीता, कोई काम नहीं हुआ है। ऐसे में परेशान जनता या तो विकल्प तलाश करेंगी या कुछ समय बाद यह सब भूल जाएगी। भोली जनता के वोटों पर चुन कर आए जनसेवकों को शर्म करनी चाहिए। चंदन पॉल, सामाजिक कार्यकर्ता।

पार्षद होने पर शर्म आती है

मनपा में जो सत्ता संघर्ष चरम पर है उसे देख

जनविकास सेना पप्पू देशमुख ने बाताया की मैं शर्मसार हो रहा हूं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में चंद्रपुर की आम जनता को रोजमर्रा के विकास कार्यों हेतु भी संघर्ष की नौबत आएगी, जहां तक विकास कार्यों का सवाल है, तो कार्य शुरु ही नहीं हुए तो अटकने का सवाल नहीं आता। अगर चंद्रपुर शहर मनपा में कुछ शुरू है तो विकास कार्य नहीं, नेताओं व उनके समर्थकों का सत्ता संघर्ष शुरू है। गुरुवार तथा शुक्रवार शाम को जो कुछ हुआ उसे देख मुझे नगरसेवक होने की लज्जा आती है।

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