

Bhandara Administration: कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम 2013 यानी पॉश एक्ट के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। जिले के जिन सरकारी, अर्धसरकारी, निजी प्रतिष्ठानों, कंपनियों, मॉल्स, स्कूलों, अस्पतालों और होटलों में 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां आंतरिक शिकायत समिति का गठन करना अनिवार्य है।
कई जगहों पर यह समितियां केवल कागजों पर मिलने और नियमों का उल्लंघन होने की शिकायतों के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने सघन जांच अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। शासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए विशेष जांच अधिकारियों की नियुक्तियां कर दी गई हैं।
ग्रामीण इलाकों में बाल विकास परियोजना अधिकारी, मुख्य सेविकाएं और महिला आर्थिक विकास महामंडल के अधिकारी जांच करेंगे, जबकि शहरी क्षेत्रों में जिला महिला बाल विकास अधिकारी और नागरी परियोजना अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह जांच दल सीधे कार्यालयों में जाकर मुख्य रूप से 10 बिंदुओं सहित कुल 31 मुद्दों पर आधारित सूची की पड़ताल करेंगे।
जांच के दौरान प्रमुखता से देखा जाएगा कि क्या संस्थान में समिति गठित है, उसका बोर्ड मुख्य द्वार पर लगा है या नहीं, समिति की अध्यक्ष कोई वरिष्ठ महिला अधिकारी है या नहीं और उसमें 50 प्रतिशत महिला सदस्य शामिल हैं या नहीं।
नियोक्ताओं से अपने रिकॉर्ड दुरुस्त करने की अपील इसके साथ ही समिति का शी बॉक्स पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण, हर तीन महीने में समीक्षा बैठक, जिलाधिकारी कार्यालय को वार्षिक रिपोर्ट भेजना और कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन की भी बारीकी से जांच की जाएगी।
अगर जांच के दौरान किसी भी संस्थान में नियमों का उल्लंघन पाया गया या समिति के गठन में कमियां मिलीं, तो अधिनियम की धारा 26 के तहत संबंधित कार्यालय प्रमुख या संस्थान पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी कार्यालय ने सभी नियोक्ताओं से अपने रिकॉर्ड दुरुस्त करने की अपील की है।