

Nagpur Mor Bhavan Terminus Vipin Itankar NMC: नागपुर मानसून की शुरुआत के साथ ही नागपुर महानगर पालिका (मनपा) की तैयारियों की पोल खुल गई है। मोर भवन बस टर्मिनस, जहां से रोजाना सैकड़ों 'आपली बसें' संचालित होती हैं, अब जलभराव और कीचड़ का केंद्र बन गया है। 7 एकड़ में फैला यह टर्मिनस बड़े-बड़े गड्डों, ढीली गिट्टी और फिसलन भरी सतह के कारण यात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए खतरनाक बन गया है।
टर्मिनस की खस्ताहाल स्थिति के चलते यात्रियों को बस तक पहुंचने के लिए कीचड़ और पानी से भरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। कई यात्री बस में चढ़ते या उतरते समय फिसलकर मामूली रूप से घायल भी हो चुके हैं। स्थिति इतनी दयनीय है कि हर गुजरती बस से गंदा पानी यात्रियों पर उछल रहा है, जिससे उनके कपड़े खराब हो रहे हैं। एक नियमित यात्री ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि हर तरफ कीचड़ है। या तो आप गंदे पानी में पैर रखें या बस में चढ़ते समय फिसलने का जोखिम उठाएं। काम पर पहुंचने तक हमारे कपड़े खराब हो जाते हैं।
अधिकारियों की उदासीनता बस स्टाफ के एक सदस्य ने बताया कि मानसून के कारण स्थिति और भी बदतर हो गई है। उन्होंने कहा कि चालक बसों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए रेंग-रेंग कर चला रहे हैं, लेकिन यात्रियों पर पानी की बौछार रोकने का कोई उपाय नहीं है।
यह पूरा टर्मिनस अब परिचालन के लिए असुरक्षित हो गया है। आश्चर्य की बात यह कि पिछले साल मानसून से पहले भी नागपुर मनपा के हॉट-मिक्स प्लांट ने टर्मिनस पर डामरीकरण (री-कार्पेटिंग) किया था, लेकिन केवल एक साल में ही वह अस्थायी सतह पूरी तरह उखड़ गई है। इससे साफ पता चलता है कि यहां किसी स्थायी इंजीनियरिंग समाधान का अभाव है।
इस बिगड़ती स्थिति को देखते हुए मनपा आयुक्त विपिन इटनकर ने बैठक बुलाई। उन्होंने परिवहन विभाग को तत्काल प्रभाव से टर्मिनस को गड्डा मुक्त करने और मरम्मत कार्य पूरा करने के कड़े निर्देश दिए। दूसरी ओर यह भी सामने आयाकि टर्मिनस पर लगभग एक दर्जन प्लेटफॉर्म होने के बावजूद एमएसआरटीसी ने मनपा को केवल 8 प्लेटफॉर्म ही उपयोग करने की अनुमति दी है। इस सीमित पहुंच के कारण भीड़ बढ़ रही है और परिचालन क्षेत्र और भी तेजी से खराब हो रहा है।