

Ayurveda for Menstruation: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनियमित पीरियड्स, दर्द, ब्लीडिंग और हार्मोनल इंबैलेंस जैसे हेल्थ प्रॉब्लम तेजी से बढ़ रहे हैं। अकेले भारत में 44 मिलियन महिलाएं इससे पीड़ित हैं। आयुर्वेद इन समस्याओं को केवल एक बीमारी नहीं मानता, बल्कि पूरे शरीर के संतुलन से जोड़कर देखता है।
आयुर्वेद के अनुसार, मासिक धर्म महिलाओं के स्वास्थ्य का संकेतक होता है और पीरियड्स किसी महिला की सेहत संबंधी जानकारी को बताता है। पीरियड्स की गुणवत्ता शरीर के पोषण, पाचन और दोष (वात, पित्त और कफ) के संतुलन पर निर्भर करती है।
आयुर्वेद में बताया गया है कि मासिक धर्म में बहने वाला खून शरीर की पहली धातु रस धातु का बाय-प्रोडक्ट होता है। मॉडर्न साइंस में इसे लिंफ कहा जाता है और यह शरीर को पोषण देता है।
जब भोजन अच्छी तरह पचता है, तो उससे बनने वाला फ्लुइड पूरे शरीर में पहुंचकर सभी अंगों और ऊतकों को पोषण और नमी प्रदान करता है। कुछ समय बाद यही रस धातु रक्त धातु में बदल जाते हैं। जिससे पीरियड्स और ब्रेस्ट फीडिंग संचालित होते हैं।
आयुर्वेद में महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अधिक आराम करने और शरीर को पर्याप्त विश्राम देने की सलाह दी जाती है।
शतावरी को महिलाओं के लिए सबसे बेस्ट हर्ब माना गया है। यह गर्भाशय को पोषण देने, अनियमित पीरियड्स, दर्द और अत्यधिक ब्लीडिंग में सहायक मानी जाती है।
एलोवेरा, जिसे संस्कृत में घृतकुमारी कहा जाता है, शरीर को ठंडक पहुंचाने और तीनों दोषों को संतुलित करने में मदद करता है। इसे मासिक धर्म और मेनोपॉज के दौरान लाभकारी माना जाता है।
अशोक की छाल लंबे समय से महिलाओं के स्वास्थ्य में उपयोग की जाती है। आयुर्वेद के अनुसार यह अधिक ब्लीडिंग, दर्द, गर्भाशय की कमजोरी तथा सिस्ट और फाइब्रॉइड जैसी परेशानियों में मदद करती है।
गुलाब की तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह शरीर को शीतलता प्रदान करती है। यह दर्द, अधिक रक्तस्राव और पीएमएस के दौरान होने वाली समस्याओं में मदद करती है।