काला शीशा वाले वाहनों पर भंडारा पुलिस का एक्शन, 58 गाड़ियों पर की कार्रवाई, वसूला जूर्माना
Bhandara News: भंडारा यातायात पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए 8 महीनों में 58 वाहनों से काली फिल्म हटवाई और चालकों पर कार्रवाई कर 52 हजार रुपये का जुर्माना वसूला।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Bhandara Police Action Against Black Film Vehicles: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पूरे देश में वाहनों पर काली फिल्म लगाने पर सख्त पाबंदी है। इस नियम का पालन करते हुए भंडारा जिला यातायात पुलिस ने पिछले 8 महीनों में अभियान चलाकर 58 वाहन चालकों पर कार्रवाई की और उनसे 52 हजार रुपये का जुर्माना वसूला।
साल 2012 में सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय देते हुए वाहनों पर काली फिल्म या गहरे रंग के शीशे लगाने पर प्रतिबंध लगाया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि इस तरह की फिल्म सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है। कई बार अपराधी इस सुविधा का इस्तेमाल कर अपराध को अंजाम देते हैं और दुर्घटनाओं की जांच में भी बाधा आती है।
2013 से ही महाराष्ट्र में इस नियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। जिला पुलिस ने जनवरी से सितंबर 2025 के बीच लगातार अभियान चलाया।इसके तहत जनवरी मं 10 वाहनों, फरवरी में 2 वाहनों,मार्च में 4 वाहनों, अप्रैल में 7 वाहनों, मई में 7 वाहनों, जून में 15 वाहनों, जुलाई में 9 वाहनों, अगस्त माह में 4 वाहनों पर कार्रवाई की गई। सितंबर माह में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन कार्रवाईयों से कुल 52 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
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गंभीर अपराध नहीं
काली फिल्म लगाने के पीछे दो प्रमुख कारण बताए जाते हैं। गर्मी से बचाव और गोपनीयता। लेकिन इसी आड़ में कई बार अपराधी वाहन का उपयोग छेड़छाड़, अपहरण, चोरी और यातायात नियम तोड़ने जैसे अपराधों के लिए करते हैं।
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अदालत ने समाज की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह सख्त आदेश लागू किया। हालांकि भंडारा जिले में पिछले आठ महीनों में किसी गंभीर आपराधिक घटना का खुलासा नहीं हुआ। फिर भी पुलिस ने नियम तोड़ने वालों से फिल्म हटवाई और जुर्माना वसूला।
वाहन चालकों के लिए सबक
सड़क पर अनुशासन और सुरक्षा बड़ी चुनौती है। काली फिल्म, अवैध हाइड्रो हेडलाइट, बदले हुए साइलेंसर और यातायात नियम तोड़ना दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ाते हैं। प्रशासन की यह कार्रवाई केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से बेहद जरूरी है।
आज तकनीक के दौर में वाहन कंपनियां सुरक्षित और गर्मी से बचाव वाले ग्रीन ग्लास या कानूनी मान्य शेडेड ग्लास उपलब्ध करा रही हैं। नागरिकों को चाहिए कि वे इन्हीं वैध विकल्पों का इस्तेमाल करें और कानून का पालन करें।
जारी रहेगी कार्रवाई
यातायात पुलिस निरीक्षक जितेंद्र बोरकर ने बताया कि वाहन चालकों को लगातार जागरूक किया जाता है। वाहन विक्रेताओं को भी निर्देश दिए हैं कि वे ग्राहकों को काली फिल्म न उपलब्ध कराएं। नियमित जांच अभियान के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।
