राजस्व मंत्री के आश्वासन से बंधी उम्मीदें, समर्थन मूल्य से 700 से 800 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर बेचना पड़
Chandrashekhar Bawankule: भंडारा जिले में 68,600 पंजीकृत किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित रह गए हैं, राजस्व मंत्री ने खरीद सीमा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से पहल करने का आश्वासन दिया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Chandrashekhar Bawankule Statement (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara Paddy Procurement Crisis: भंडारा जिले के धान उत्पादक किसानों के लिए इस वर्ष का खरीफ सीजन दोहरी मार लेकर आया है। एक ओर जहां प्रकृति की अनिश्चितता ने फसल को प्रभावित किया, वहीं दूसरी ओर सरकारी खरीद की नीतिगत सीमाओं ने हजारों किसानों को आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। वर्तमान स्थिति यह है कि जिले के करीब 68,600 पंजीकृत किसान अपना धान सरकारी केंद्रों पर बेचने से वंचित रह गए हैं।
हालांकि, राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की ओर से दिए गए हालिया आश्वासन ने किसानों के बीच उम्मीद की एक नई किरण जगाई है। भंडारा जिला मार्केटिंग फेडरेशन के माध्यम से होने वाली समर्थन मूल्य खरीदी के लिए खरीफ सीजन में कुल 1 लाख 56 हजार 715 किसानों ने ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इनम से केवल 88 हजार 115 किसान ह अपना लगभग 31 लाख क्विंटल धान बेच पाए। जैसे ही शासन की ओर से निर्धारित खरीद का लक्ष्य पूरा हुआ औन समयसीमा समाप्त हुई, खरीदी प्रक्रिय तत्काल बंद कर दी गई।
किसानों पर कर्ज चुकाने का भारी दबाव
इसके परिणामस्वरूप 68,600 किसान जिन्होंने भरोसे के साथ पंजीकरण कराया था, कतार में ही खड़े रह गए, खरीद बंद होने के कारण हजारों क्विंटल धान आज भी जिले के विभिन्न सरकारी केंद्रों और किसानों के घरों में पड़ा हुआ है। इस बीच, रबी सीजन की आहट और खरीफ के नए चक्र की तैयारी के कारण किसानों पर खाद, बीज और कर्ज चुकाने का भारी दबाव है। सरकारी केंद्रों पर बिक्री न होने की मजबूरी का फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं। कई किसानों को अपना धान खुले बाजार में समर्थन मूल्य से 700 से 800 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर बेचना पड़ रहा है। यह स्थिति छोटे और सीमांत किसानों के लिए कमर तोड़ने वाली साबित हो रही है।
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प्रशासनिक पेंच और किसानों की मांग
पीडित किसान लगातार जिला मार्केटिंग फेडरेशन के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि खरीद का लक्ष्य बढ़ाया जाए और समयसीमा में विस्तार किया जाए ताकि पंजीकृत किसानों का पूरा धान खरीदा जा सके। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि वे राज्य सरकार के आदेशों के बिना प्रक्रिया दोबारा शुरू नहीं कर सकते। लक्ष्य वृद्धि का प्रस्ताव शासन के पास लंबित होने के कारण खरीदी केंद्र सूने पड़े हैं और किसानों का धैर्य जवाब दे रहा है।
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मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की पहल
इसी संकट के बीच राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने हस्तक्षेप करते हुए किसानों को राहत देने की बात कही है, उन्होंने मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के साथ चर्चा कर धान खरीद की सीमा (लिमिट) बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
मंत्री के इस रुख से किसानों को उम्मीद है कि जल्द ही शासन की ओर से कोई सकारात्मक अधिसूचना जारी होगी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते खरीद लिमिट नहीं बढ़ाई गई, तो जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ेगा। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे तीव्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल, 68 हजार से ज्यादा किसानों की नजरें मुंबई और दिल्ली से आने वाले आधिकारिक आदेश पर टिकी है।
