Sanjay Shirsat Ghost Statement Sambhaji Nagar (फोटो क्रेडिट-X)
Sanjay Shirsat Ghost Statement Sambhaji Nagar: छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) की राजनीति में इन दिनों विकास और प्रशासन के मुद्दों को छोड़कर ‘प्रेतात्माओं’ और ‘कब्रिस्तान’ की चर्चा जोरों पर है। जिले के पालक मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अत्यंत विवादित और चौंकाने वाला बयान दिया है। शिरसाट का दावा है कि वर्तमान नगर निगम भवन जिस जमीन पर बना है, वह पहले एक कब्रिस्तान था, और इसी वजह से वहां की ‘आत्माएं’ आज भी बेचैन हैं। उनके अनुसार, निगम की खराब छवि और वहां के कामकाज में आने वाली बाधाओं के पीछे इन्हीं अदृश्य शक्तियों का हाथ है।
पालक मंत्री शिरसाट ने सुझाव दिया है कि यदि नगर निगम को इन परेशानियों और ‘मुक्ति’ से छुटकारा दिलाना है, तो इस इमारत को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर देना चाहिए। उन्होंने एक नई भव्य इमारत बनाने के लिए आवश्यक धन देने का भी आश्वासन दिया। शिरसाट के इस बयान ने न केवल वैज्ञानिक सोच रखने वाले लोगों को हैरान किया है, बल्कि विपक्षी दलों को भी सत्ता पक्ष पर निशाना साधने का सुनहरा मौका दे दिया है। एआईएमआईएम (MIM) के प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए शिरसाट के तर्कों की धज्जियां उड़ाई हैं।
इम्तियाज जलील ने संजय शिरसाट पर कटाक्ष करते हुए उन्हें उनके राजनीतिक इतिहास की याद दिलाई। जलील ने सवाल उठाया कि शिरसाट और उनकी पार्टी पिछले 25 वर्षों से इसी नगर निगम से सत्ता चला रहे हैं, और शिरसाट स्वयं वहां लंबे समय तक पार्षद रहे हैं। जलील ने तंज कसते हुए पूछा, “क्या इन 25 वर्षों में आपको कभी वहां किसी भूत-प्रेत का अहसास नहीं हुआ? क्या पच्चीस साल बाद अचानक आत्माएं जाग गई हैं?” जलील का तर्क है कि प्रशासन की विफलताओं को छिपाने के लिए अंधविश्वास का सहारा लेना हास्यास्पद है।
जलील ने शिरसाट के सुझाव का चतुराई से समर्थन करते हुए एक नई शर्त रख दी है। उन्होंने कहा कि वे नया नगर निगम भवन बनाने के पक्ष में हैं, लेकिन इसे एन-12 क्षेत्र की उस जमीन पर बनाया जाना चाहिए जहाँ वर्तमान में कचरा संग्रहण उपकेंद्र (गारबेज डिपो) बनाने की योजना है। दरअसल, जलील इस डिपो का विरोध कर रहे हैं क्योंकि यह उनके आवास के करीब है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कचरा डिपो की जगह शानदार नगर निगम भवन बन जाता है, तो वहां की जमीन का सदुपयोग होगा और कचरे की समस्या से भी निजात मिल जाएगी।
संजय शिरसाट के इस ‘आत्मा’ वाले बयान को लेकर शहर में नई बहस छिड़ गई है। जहाँ भाजपा और शिवसेना के कुछ नेता इस जगह के इतिहास को लेकर शिरसाट का समर्थन कर रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे जनता का ध्यान भटकाने वाली राजनीति बता रहा है। जलील पर भी सत्ता पक्ष द्वारा ‘ब्लैकमेलिंग’ और अपने निजी हितों के लिए कचरा डिपो का विरोध करने के आरोप लग रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या वाकई ‘प्रेतात्माओं’ के डर से करोड़ों की लागत वाला नगर निगम भवन बदला जाएगा या यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएगा।