भंडारा नप चुनाव में धनबल का दबदबा, प्रचार खर्च ने तोड़े रिकॉर्ड, 622 उम्मीदवार मैदान में
Bhandara Election: भंडारा जिले की चार नगर परिषदों के चुनाव नतीजों ने सियासी समीकरण बदले। 104 सीटों पर 622 उम्मीदवार उतरे। चुनाव विकास से ज्यादा धनबल की लड़ाई बने, प्रचार और खर्च ने नए रिकॉर्ड बनाए।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Bhandara Municipal Council Election Results: जिले की भंडारा, तुमसर, पवनी और साकोली नप के आम चुनाव के नतीजे रविवार को घोषित हुए। इन चुनावों ने न केवल राजनीतिक समीकरण बदले, बल्कि प्रचार की शैली और खर्च के मामले में भी नए कीर्तिमान स्थापित किए।
लोकतंत्र के इस उत्सव में कुल 104 सीटों के लिए 622 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई, जिनमें से 518 को पराजय का सामना करना पड़ा। इस बार के चुनाव की सबसे बड़ी खासियत उम्मीदवारों द्वारा किया गया अवाध्य खर्च रहा।
चुनाव विकास के मुद्दों से अधिक आर्थिक क्षमता की लड़ाई बनता दिखा। शिंदे गुट की शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी ने स्थानीय चुनावों में सीधे मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की सभाएं आयोजित की, जिससे स्थानीय चुनावों को राज्यस्तरीय राजनीति का रंग मिला।
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शक्ति प्रदर्शन के लिए भव्य रैलियां, सैकड़ों वाहनों के काफिले और ईंधन व किराये पर लाखों रुपये खर्च हुए, मतदान से पहले कार्यकर्ताओं को जोड़े रखने के लिए खानपान और दैनिक भत्तों पर भी बड़ी रकम बहाई गई।
प्रचार में आधुनिक तकनीक का उपयोग
पारंपरिक प्रचार से आगे बढ़ते हुए इस बार डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक इस्तेमाल हुआ। युवाओं को आकर्षित करने के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हॉट्सऐप जैसे माध्यम केंद्र में रहे। छवि निर्माण के लिए पेशेवर डिजिटल टीमों की नियुक्ति की गई। आकर्षक वीडियो और ग्राफिक्स के जरिए उम्मीदवारों ने सीधे मतदाताओं के मोबाइल तक पहुंच बनाने की कोशिश की।
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प्रत्याशियों का छिपा हुआ अर्थतंत्र
- हालांकि चुनाव आयोग ने खर्च की सीमा तय की थी, फिर भी अप्रत्यक्ष खर्च का गणित काफी जटिल रहा।
- कागजों में सीमित खर्च दिखाकर, वास्तविकता में छिपे तरीकों से मतदाताओं तक पहुंच बनाई गई।
- विशेषकर मतदान की पूर्व संध्या पर होने वाला ‘गुप्त प्रचार’ और स्थानीय दबाव समूहों के साथ किए गए लेन-देन चुनावी मशीनरी के लिए सिरदर्द बने।
- निगरानी के बावजूद वास्तविक और घोषित खर्च में बड़ा अंतर देखा गया।
आंकड़ों में चुनाव का चित्र
| पद | सीटें | उम्मीदवार | विजयी | पराजित |
|---|---|---|---|---|
| नगराध्यक्ष | 04 | 34 | 04 | 30 |
| नगरसेवक | 100 | 588 | 100 | 488 |
| कुल | 104 | 622 | 104 | 518 |
खेमों में पराजय का चल रहा आत्ममंथन
पराजित हुए 518 उम्मीदवारों के खेमों में निराशा का माहौल है। भारी-भरकम खर्च के बावजूद मतदाताओं का फैसला कई के लिए अप्रत्याशित रहा, जिससे आत्ममंथन शुरू हो गया है। यह परिणाम एक बार फिर रेखांकित करता है कि सिर्फ पैसे के बल पर चुनाव नहीं जीता जा सकता जनसंपर्क और विश्वसनीयता उतनी ही अहम होती है।
