चरम पर पहुंचा मानव-वन्यजीव संघर्ष: 5 माह में 6 की मौत, 19 घायल-बाघ-तेंदुओं की दहशत से कांपा भंडारा
Bhandara Tiger Attack: भंडारा जिले में जनवरी से मई 2026 के बीच बाघ और तेंदुओं के हमलों में 6 लोगों की मौत और 19 लोग घायल हुए हैं। वन्यजीवों की बढ़ती दहशत से ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल है।
Tiger Attack (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Leopard Terror In Bhandara: वन संपदा से समृद्ध भंडारा जिले में पिछले कुछ महीनों से मानव और वन्यजीवों के बीच का संघर्ष बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। जनवरी से मई 2026 के बीच बीते महज पांच महीनों के भीतर वन्यजीवों के हमलों में 6 बेकसूर नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि 19 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। क्षेत्र में बाघ और तेंदुओं की बढ़ती दहशत के कारण पूरे जिले के ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल बना हुआ है। जिले में 19 मार्च को वसंत मेश्राम पर हुए हमले से शुरू हुआ यह जानलेवा सिलसिला मई का महीना बीतने को है, लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
अडयाल पुलिस थाना अंतर्गत पिलांद्री जंगल परिसर में शुक्रवार, 22 मई को जंगल में घास काटने गए कोदुर्ली निवासी बाबूराव नत्थूजी पिल्लेवान पर एक बाघ ने अचानक हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इससे पहले नवेगांवनागझिरा अभयारण्य के सीमावर्ती इलाके में एक बाघिन ने महज 15 दिनों के भीतर तीन भीषण हमले किए थे। इन हमलों में घायल 19 मार्च को वसंत मेश्राम और 28 मार्च को माया सोनवाने की इलाज के दौरान मौत हो गई थी, जबकि 1 अप्रैल को इसी बाघिन ने छाया मुंगमोडे को हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
बच्ची और चरवाहे को बनाया शिकार
साकोली वनपरिक्षेत्र के सोनका पलसगांव निवासी चरवाहे दौलत मणिराम राउत पर 19 जनवरी को जंगल में एक भालू ने जानलेवा हमला कर दिया था, इनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। 15 अप्रैल को विर्शी में एक घटना सामने आई, जहां छत्तीसगढ़ निवासी काशीराम मिरी की 5 वर्षीय मासूम बेटी अंशिका मिरी को मक्के के खेत में छिपे एक तेंदुए ने अपना शिकार बना लिया, जिससे बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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मवेशियों की मौत 375
खेती ठप, ग्रामीण अर्थव्यवस्था संकट में वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी के दिनों की कृषि मशक्कत, रबी धान की कटाई और तेंदूपत्ता तोड़ाई का मुख्य सीजन चल रहा है। लेकिन जंगलों और खेतों के आसपास बाघतेंदुओं की लगातार मौजूदगी के कारण मजदूर और महिलाएं खेतों में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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किसान पूरी तरह बेबस
हाथ में आई फसल के बर्बाद होने के डर से किसान पूरी तरह बेबस हैं। हालांकि, वन विभाग ने हाल ही में दो तेंदुओं को पिंजरे में कैद कर सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा है। सरकारी मुआवजे का इंतजार भंडारा वन विभाग के तहत भंडारा, पवनी, अडयाल, साकोली, लाखनी, लाखांदुर, लेंडेझरी, जांबकांद्री, नाकाडोंगरी और तुमसर वनपरिक्षेत्र आते हैं। यह पूरा इलाका नवेगांवनागझिरा बाघ परियोजना, कोका और उमरेडकरहांडला अभयारण्य से घिरा होने के कारण यहां वन्यजीवों की भारी उपस्थिति देखी जा रही है।
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जंगली जानवरों की ओर से खेतों में घुसकर फसल नष्ट करने की करीब 3,706 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसके अलावा तबेले और गोठे में घुसकर तेंदुओं की ओर से किए गए हमलों में 375 मवेशियों की जान जा चुकी है। फसल और पशुधन के इस भारी नुकसान के लिए शासन स्तर से करोड़ों रुपये का मुआवजा मिलना अभी बाकी है।
