स्कूली बच्चे (सौजन्य-सोशल मीडिया, कंसेप्ट फोटो)
Swadhar Yojana Bhandara: इस शैक्षिक वर्ष में भंडारा जिले के सामाजिक न्याय विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों में अपेक्षित संख्या में विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल पाया है। इसका परिणाम यह रहा कि जिले के पांच छात्रावासों में कुल 121 सीटें रिक्त रह गई हैं। सामाजिक न्याय विभाग की ओर से इसके लिए तहसील स्तर पर शुरू की गई स्वाधार योजना को कारण बताया जा रहा है, लेकिन इस तर्क से कई लोग सहमत नहीं हैं।
दरअसल, स्वाधार योजना का लाभ उन्हीं विद्यार्थियों को दिया जाता है, जिन्हें किसी कारणवश सरकारी छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता। ऐसे में यह कहना कि स्वाधार योजना के कारण छात्रावासों में सीटें खाली रह गईं, पूरी तरह तर्कसंगत नहीं माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रावासों की भौगोलिक स्थिति, सुविधाओं की कमी और जागरूकता का अभाव भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।पवनी स्थित छात्रावास को लेकर यह चर्चा है कि वह शहर से काफी दूर स्थित है। साथ ही यह लड़कियों का छात्रावास होने के कारण अभिभावकों और छात्राओं ने वहां प्रवेश लेना उचित नहीं समझा।
इसी तरह अन्य कुछ छात्रावासों की स्थिति भी विद्यार्थियों को आकर्षित नहीं कर पाई। सामान्यतः सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से पढ़ाई के लिए आने वाले विद्यार्थियों को सरकारी छात्रावास में प्रवेश नहीं मिलने पर भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्हें रहने और खाने की व्यवस्था अपने खर्च पर करनी पड़ती है। आर्थिक तंगी के कारण कई विद्यार्थियों को पढ़ाई तक छोड़नी पड़ती है। ऐसी स्थिति से बचाने के लिए अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए स्वाधार योजना लागू की गई थी, जिससे हजारों छात्रों को राहत मिली है।
| छात्रावास | सीटें |
|---|---|
| पवनी लड़कों का छात्रावास | 27 |
| साकोली लड़कियों का छात्रावास | 4 |
| लाखनी लड़कियों का छात्रावास | 35 |
| लाखनी लड़कों का छात्रावास | 30 |
| तुमसर लड़कों का छात्रावास | 25 |
यदि भंडारा जिले के रिक्त छात्रावासों की स्थिति पर नजर डालें तो सामाजिक न्याय विभाग के अंतर्गत पवनी के लड़कों के छात्रावास में 27 सीटें, साकोली के लड़कियों के छात्रावास में 4, लाखनी के लड़कियों के छात्रावास में 35, लाखनी के लड़कों के छात्रावास में 30 तथा तुमसर के लड़कों के छात्रावास में 25 सीटें रिक्त पाई गई हैं। इन पांच छात्रावासों में कुल 121 विद्यार्थियों का प्रवेश नहीं हो सका।
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गौरतलब है कि जिले में सामाजिक न्याय विभाग के कुल 9 छात्रावास संचालित हैं, जिनकी कुल प्रवेश मान्य क्षमता 800 विद्यार्थियों की है। इनमें से भवन क्षमता 785 विद्यार्थियों की है, लेकिन इस वर्ष केवल 664 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया है। यानी कुल मिलाकर बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं। रिक्त सीटों के विस्तृत विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि शालेय विभाग में सबसे अधिक 63 विद्यार्थियों ने प्रवेश लेने में रुचि नहीं दिखाई।
| विभाग | रिक्त सीटें |
|---|---|
| शालेय विभाग | 63 |
| कनिष्ठ विभाग | 3 |
| गैर-व्यावसायिक विभाग | 37 |
| व्यावसायिक विभाग | 18 |
वहीं कनिष्ठ विभाग की 3, गैर-व्यावसायिक विभाग की 37 और व्यावसायिक विभाग की 18 सीटें रिक्त रह गई हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि इन 9 छात्रावासों में से 5 छात्रावास किराए की इमारतों में संचालित हो रहे हैं। इनमें भंडारा शहर के नए लड़कियों के छात्रावास, भंडारा के लड़कों का छात्रावास, लाखनी के लड़कियों और लड़कों के छात्रावास तथा तुमसर का छात्रावास शामिल है।
अनुसूचित जाति व नवबौद्ध लड़कियों के लिए राजेदहेगांव में संचालित शासकीय निवासी स्कूल में भी सीटें रिक्त रही हैं। इस स्कूल की प्रवेश क्षमता 200 निर्धारित है, लेकिन वर्तमान में केवल 184 छात्राओं ने प्रवेश लिया है, जिससे 16 सीटें खाली रह गई हैं। कुल मिलाकर जिले में छात्रावासों और निवासी स्कूलों में सीटें खाली रहना शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गया है, जिस पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।