Satara: महायुति के एक और मंत्री पर महाग्रहण, जयकुमार गोरे पर चलता रहेगा एट्रॉसिटी, जानें पूरा मामला
Jaykumar Gore Atrocity Case: सातारा कोर्ट ने कैबिनेट मंत्री जयकुमार गोरे की बरी होने की अर्जी खारिज की। जमीन जालसाजी और एट्रोसिटी केस में चलेगा मुकदमा। सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत।
- Written By: प्रिया जैस
जयकुमार गोरे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Satara News: महाराष्ट्र के एक और मंत्री पर महा ग्रहण लग गया है। सातारा कोर्ट ने कैबिनेट मंत्री जयकुमार गोरे के खिलाफ नकली जमीन के डॉक्यूमेंट्स और एट्रोसिटीज एक्ट के तहत दर्ज केस में बरी करने की एप्लीकेशन रिजेक्ट कर दी है और उनके और दूसरे आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम करके उन पर केस चलाने का अहम ऑर्डर दिया है।
इसकी वजह से जयकुमार गोरे को अब इन गंभीर मामले में क़ानूनी कारवाई का सामना करना पड़ेगा। सातारा स्पेशल कोर्ट के जज एस. आर. तंबोली ने कहा कि इस स्टेज पर, सवाल यह नहीं है कि आरोपी दोषी है या नहीं, बल्कि यह है कि केस चलाने के लिए ‘प्राइमा फेसी केस’ है या नहीं।
इसका सीधा मतलब है कि जज के अनुसार केस को आगे बढ़ाने के लिए काफी सबूत हैं, स्पेशल कोर्ट ने यह ऑर्डर अनुसूचित जाति के शिकायतकर्ता महादेव पिराजी भिसे (महाराष्ट्र राज्य) बनाम जयकुमार भगवान गोरे और अन्य के स्पेशल एट्रोसिटीज केस नंबर 149/2022 में दिया है।
सम्बंधित ख़बरें
मोबाइल की लास्ट लोकेशन से मिला घटनास्थल, अंबेनली की 800 फीट गहरी खाई में मुश्किल भरा रेस्क्यू ऑपरेशन
उदयनराजे और मैं अंपायर, हम ही तय करेंगे कौन आउट और कौन नॉट आउट, सातारा में शिवेंद्रसिंहराजे की सियासी बल्लेबाज
सोलापुर MLC चुनाव के लिए बीजेपी मजबूत, निर्विरोध जीत की जयकुमार गोरे की कोशिश
PM मोदी की अपील के बाद CM फडणवीस का बड़ा फैसला, महाराष्ट्र में 6 महीने तक नहीं होंगे बड़े सरकारी कार्यक्रम
केस का बैकग्राउंड और गंभीर आरोप
इस कानूनी लड़ाई के पीछे प्रॉसिक्यूशन द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप हैं। प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, आरोपियों ने एक मरे हुए व्यक्ति के नाम पर नकली डॉक्यूमेंट्स तैयार करके जमीन हड़पने की साजिश रची थी। मामला महाराष्ट्र के मयानी गांव में जमीन के संबंध में फर्जी दस्तावेज तैयार करने से संबंधित, है, जिसे महादेव पिराजी भिसे की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है।
बचाव पक्ष की दलील
कोर्ट में बचाव पक्ष के वकीलों ने जोरदार दलीले दी। शुरुआत में, इंडियन पीनल कोड की धाराओं के तहत भी बरी करने की अपील की गई, लेकिन बाद में बचाव पक्ष ने अपनी दलील सिर्फ एट्रोसिटीज एक्ट के तहत दर्ज अपराधों को रद्द करने पर फोकस की।
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली थी राहत
साल 2022 में गोरे ने इस मामले में राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था लेकिन उस समय शीर्ष अदालत ने भाजपा विधायक जयकुमार गोरे को निर्देश दिया कि वह ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करें और जमानत के लिए आवेदन करें।
