वन विभाग की अनोखी पहल: बाघों को चकमा देने के लिए 1000 मुखौटे बांटे गए
Bhandara Forest Department News: भंडारा जिले में बाघों की बढ़ती दहशत के बीच वन विभाग ने तेंदूपत्ता मजदूरों की सुरक्षा के लिए मजदूरों को सिर के पीछे मानव चेहरे वाले विशेष मुखौटे वितरित किए जा रहे हैं।
Tiger Attack Prevention (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Bhandara Tiger Attack Prevention News: भंडारा जिले में इन दिनों बाघों की बढ़ती दहशत के बीच वन विभाग ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए एक अनोखी और प्रभावी पहल शुरू की है। तेंदूपत्ता तोड़ने वाले मजदूरों को बाघों के हमलों से बचाने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा चेहरे के पीछे चेहरा यानी मानव चेहरे वाले विशेष मुखौटे वितरित किए जा रहे हैं। इस प्रयोग के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और बाघ भी इस युक्ति से भ्रमित हो रहे हैं। जंगल में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
इन दिनों जंगलों में तेंदूपत्ता संग्रहण का सीजन जारी है, जिसके चलते हजारों मजदूर रोज सुबह जंगलों में काम के लिए जाते हैं। मजदूरों को हिंसक वन्यप्राणियों से सुरक्षित रखने के लिए सहायक वनसंरक्षक साकोली संजय मेंढे तथा लाखनी वनपरिक्षेत्र अधिकारी नितेश धनविजय के मार्गदर्शन में वनकर्मियों ने प्लास्टिक के मानव चेहरे वाले मुखौटे बांटना शुरू किया है।
23 मई को लाखनी वनपरिक्षेत्र अधिकारी नितेश धनविजय के नेतृत्व में जांभली सड़क सहवन क्षेत्र के बरडकिन्ही बीट में मजदूरों को मुखौटे वितरित किए गए। इस दौरान क्षेत्र सहायक आर।जी। मेश्राम, बीटरक्षक सुधीर कुंभरे तथा शीघ्र कृती दल के सदस्य उपस्थित थे। पूरे लाखनी वनक्षेत्र में लगभग 1000 मुखौटे वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है।
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पवनी मॉडल बना प्रेरणा
पिछले कुछ दिनों में साकोली क्षेत्र में बाघ और तेंदुए के हमलों में तीन लोगों की मौत तथा एक महिला के गंभीर रूप से घायल होने की घटनाओं ने दहशत पैदा कर दी थी। इसके बाद वन विभाग ने भंडारा जिले के पवनी मॉडल को अपनाया। दो वर्ष पहले पवनी वनपरिक्षेत्र में पहली बार नागरिकों को ऐसे मुखौटे वितरित किए गए थे।
बाघ सामान्यतः पीछे से हमला करता है। मजदूरों के सिर के पीछे मानव चेहरे वाला मुखौटा लगाने से बाघ को ऐसा लगता है कि व्यक्ति दोनों तरफ से उसे देख रहा है। इससे वह हमला करने से बचता है। वन विभाग के अनुसार, इस प्रयोग के बाद पवनी क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में बाघ के हमले से एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।
सुंदरबन की तर्ज पर लाखनी में प्रयोग
पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध सुंदरबन क्षेत्र में मध संग्रह करने वाले लोग वर्षों से बाघों से बचने के लिए इस तकनीक का उपयोग करते हैं। अब उसी मॉडल को भंडारा जिले के लाखनी वनक्षेत्र में अपनाया जा रहा है। तेंदूपत्ता या महुआ फूल इकट्ठा करते समय मजदूर अक्सर झुककर काम करते हैं, जिससे वे बाघ के लिए आसान शिकार बन जाते हैं। लेकिन सिर के पीछे लगे मानव चेहरे वाले मुखौटे के कारण बाघ भ्रमित होकर वहां से चला जाता है।
महत्वपूर्ण सुरक्षा सलाह
मानववन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग ने ग्रामीणों और मजदूरों को कई महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति अकेले जंगल में तेंदूपत्ता संग्रह के लिए न जाएं। हमेशा समूह में जाए, दिन पूरी तरह निकलने के बाद ही जंगल में प्रवेश करे और छोटे बच्चों को साथ ले जाने से बचें।
