कामबंद आंदोलन से भंडारा में स्वास्थ्य केंद्रों पर सन्नाटा, डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ा
Bhandara News: भंडारा जिले में डेंगू और मलेरिया के मरीज बढ़ रहे हैं, जबकि ग्रामीण स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर 12 दिनों से कामबंद आंदोलन पर हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई हैं।
- Written By: आकाश मसने
स्वास्थ्य केंद्र (फोटो नवभारत)
Bhandara News in Hindi: भंडारा जिले में डेंगू, मलेरिया जैसे संक्रामक रोगों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे संकट के समय ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर आधारित राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत कार्यरत अनुबंधित कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर पिछले 12 दिनों से कामबंद आंदोलन शुरू किया है। आंदोलन के चलते ग्रामीण गांवों में स्वास्थ्य यंत्रणा पूरी तरह ठप हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान अंतर्गत लगभग 650 अनुबंधित कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें डॉक्टर, नर्स, समुदाय स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) शामिल हैं। उनकी प्रमुख मांगों में सेवा स्थायी करना, एकमुश्त बदली, नामावली राज्य स्तर पर करना और वेतनवृद्धि शामिल है। शासन और प्रशासन की ओर से अब तक ठोस उपाययोजना नहीं की गई है, जिसके कारण हालात गंभीर बने हुए हैं।
मरीजों की जान का संकट
स्वास्थ्य सेवाएं बंद होने से टीकाकरण कार्यक्रम रुक गया है, शालेय स्वास्थ्य जांच ठप है, नवजात शिशुओं के लिए अति दक्षता कक्ष बंद कर दिए गए हैं और आयुष्मान भारत के अंतर्गत मिलने वाली 13 सेवाएं भी बाधित हैं। बारिश के मौसम में संक्रामक रोगों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।
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डेंगू जैसे बुखार के मरीज बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। साथ ही मलेरिया और बुखार के मामलों में भी बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे समय में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने से मरीजों की स्थिति और अधिक गंभीर हो रही है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और शिशुओं की सेवाएं प्रभावित हो गई हैं।
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प्रसूता महिलाओं का रक्त परीक्षण रुक गया है, दवाई आपूर्ति ठप हो गई है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर बढ़ने का खतरा गहरा गया है। आंदोलन में शामिल कर्मचारियों में 130 समुदाय स्वास्थ्य अधिकारी, 250 एएनएम, 100 स्टाफ नर्स, इसके अलावा एमओ, लैब कर्मचारी और अन्य सहायक कर्मचारी शामिल हैं। उनकी अनुपस्थिति से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह ठप हो चुकी है।
ग्रामीण जनता और मरीज इस संकट से परेशान हैं और शासन-प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा कर रहे हैं। यदि आंदोलन जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो जिले में संक्रामक रोगों का फैलाव गंभीर रूप ले सकता है।
