सेना की नौकरी से जन लोकपाल आंदोलन तक: 90 साल के हुए अन्ना हजारे, जानें उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट
Anna Hazare 90th Birthday: साधारण ट्रक ड्राइवर से भ्रष्टाचार के खिलाफ देश की आवाज बनने वाले अन्ना हजारे आज 90 वर्ष के हो गए हैं। जानिए सेना से जन लोकपाल तक का उनका प्रेरणादायी सफर।
- Written By: गोरक्ष पोफली
अन्ना हजारे का 90वां जन्मदिन (सोर्स: सौजन्य AI डिजाइन फोटो)
Anna Hazare Biography: भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सशक्त आवाज और अहिंसा के आधुनिक प्रतीक, किशन बाबूराव हजारे, जिन्हें पूरी दुनिया अन्ना हजारे के नाम से जानती है, आज अपना 90वां जन्मदिन मना रहे हैं। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश की राजनीति और व्यवस्था को झकझोर देने वाले इस जन-नायक का सफर किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है।
साधारण शुरुआत और सेना का संघर्ष
अन्ना हजारे के जीवन का शुरुआती सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। सेना में भर्ती होने से पहले उन्होंने मुंबई में एक आम ट्रक ड्राइवर के रूप में अपना जीवन शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना में कदम रखा, जहाँ उन्होंने 15 वर्षों तक सेवा दी। सेना में उन्होंने पहले एक ट्रक ड्राइवर के रूप में और फिर एक सैनिक के रूप में लेह-लद्दाख, मिजोरम, असम, जम्मू-कश्मीर और सिक्किम जैसी दुर्गम जगहों पर कठिन परिस्थितियों में काम किया।
जीवन का महत्वपूर्ण मोड़
26 वर्ष की आयु में एक ऐसा समय भी आया जब अन्ना हज़ारे जीवन से निराश हो गए थे और उन्होंने आत्महत्या तक का विचार किया था। लेकिन तभी स्वामी विवेकानंद की एक पुस्तक उनके जीवन में रोशनी बनकर आई। उस पुस्तक को पढ़कर उन्हें यह अहसास हुआ कि जीवन का प्राथमिक लक्ष्य मानवता की सेवा करना है। उन्होंने यह माना कि आम इंसानों की भलाई के लिए काम करना ईश्वर को प्रार्थना करने के समान है।
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रालेगण सिद्धि: बदलाव की प्रयोगशाला
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अन्ना ने अपने पैतृक गाँव रालेगण सिद्धि की तस्वीर बदलने का बीड़ा उठाया। उन्होंने इस सूखे और पिछड़े गाँव को एक मॉडल विलेज के रूप में पूरी तरह से बदल दिया। उनके इस अभूतपूर्व सामाजिक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग: जन लोकपाल और आरटीआई
अन्ना हजारे को देश के सबसे सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ताओं में गिना जाता है, जो अपने अहिंसक तरीकों और भूख हड़ताल के माध्यम से व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने महसूस किया कि व्यवस्था की खामियों के कारण भ्रष्टाचार पनपता है, इसलिए उन्होंने सूचना का अधिकार कानून पास करवाने और जन लोकपाल विधेयक के लिए अथक प्रयास किए। उनके आंदोलनों ने न केवल भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम लगाई, बल्कि आम आदमी को सशक्त बनाने का काम भी किया।
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आज अपने 90वें वर्ष में प्रवेश करते हुए भी अन्ना की ऊर्जा और देश के प्रति समर्पण कम नहीं हुआ है। एक ट्रक ड्राइवर से शुरू हुआ उनका यह सफर आज करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो एक अकेला व्यक्ति भी पूरे राष्ट्र में चेतना जगा सकता है।
