भंडारा में बेकाबू हुआ ध्वनि प्रदूषण: कागजों तक सिमटे 'साइलेंस जोन', 80 डेसिबल से अधिक शोर

Bhandara News: भंडारा शहर में धूल और ध्वनि प्रदूषण से जनता बेहाल है। अस्पतालों और स्कूलों के पास भी साइलेंस जोन का पालन नहीं हो रहा है। डीजे और हॉर्न के शोर से बढ़ते बहरेपन के खतरे पर विस्तृत रिपोर्ट।
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प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Noise Pollution Issues In Bhandara: महाराष्ट्र के भंडारा शहर में इन दिनों धूल और ध्वनि प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है। शहर की सड़कों पर बढ़ती वाहनों की संख्या और बजते कर्कश हॉर्न ने नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। विडंबना यह है कि प्रशासन द्वारा घोषित 'साइलेंस जोन' (शांति क्षेत्र) केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सरकारी कार्यालयों के आसपास, जहाँ शांति अनिवार्य होनी चाहिए, वहाँ भी शोर पर किसी प्रकार का प्रभावी नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा है।

अस्पतालों और स्कूलों पर मंडराता संकट

शहर में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित जिला सामान्य अस्पताल और कई निजी नर्सिंग होम ध्वनि प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। यहाँ भर्ती मरीजों को वाहनों के लगातार बजते हॉर्न और रैलियों के शोर के कारण आराम नहीं मिल पा रहा है। यही स्थिति शैक्षणिक संस्थानों की भी है; परीक्षा के समय में तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर और डीजे छात्रों की एकाग्रता भंग कर रहे हैं। उद्यानों की शांति भी अब बीते जमाने की बात हो गई है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को मिलने वाला प्राकृतिक सुकून खत्म हो गया है।

80 डेसिबल से अधिक आवाज: बहरेपन का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि 80 डेसिबल से अधिक की ध्वनि मानव कानों के लिए बेहद खतरनाक होती है। इसका जीता-जागता उदाहरण दो साल पहले सालई खुर्द क्षेत्र में देखने को मिला था, जहाँ एक युवक डीजे की भीषण आवाज के कारण अपने एक कान की सुनने की क्षमता पूरी तरह खो बैठा। शहर में त्योहारों, जयंतियों और विवाह समारोहों के दौरान बजने वाले डीजे और बिना साइलेंसर वाली दोपहिया गाड़ियां इस खतरे को लगातार बढ़ा रही हैं।

लापरवाही और कार्रवाई का अभाव

नागरिकों का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों और रैलियों के नाम पर नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जाती हैं, लेकिन प्रशासन अक्सर इसे अनदेखा कर देता है। बिना अनुमति के तेज आवाज में बजने वाले डीजे और मॉडिफाइड साइलेंसर वाले वाहनों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से उल्लंघनकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं। जनता अब मांग कर रही है कि प्रशासन केवल कागजों पर साइलेंस जोन न बनाए, बल्कि जमीन पर सख्त निगरानी और जुर्माने की व्यवस्था लागू करे।

भंडारा शहर की शांति और नागरिकों के स्वास्थ्य को बचाने के लिए अब समय आ गया है कि पुलिस और नगर प्रशासन आपसी समन्वय से काम करें। साइलेंस जोन में विशेष बोर्ड लगाए जाएं और ध्वनि सीमा का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो। यदि समय रहते इन बढ़ते डेसिबल पर लगाम नहीं लगाई गई, तो शहर की एक बड़ी आबादी सुनने की अक्षमता और मानसिक तनाव का शिकार हो सकती है।

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