‘जुबान काट दो, लहजा बदल नहीं सकता…’, बीड में विपक्ष पर गरजे धनंजय मुंडे
Dhananjay Munde in Beed : एनसीपी नेता धनंजय मुंडे जो काफी दिनों से शांत थे और बयानबाजी से बच रहे थे। उन्होंने आज बीड में आयोजित एक कार्यक्रम में अपना मौन तोड़ा है और विपक्ष पर हमला बोला है।
- Written By: प्रिया जैस
धनंजय मुंडे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Dhananjay Munde in Beed : एनसीपी (अजित पवार गुट) ने बीड के यशवंतराव चव्हाण सभागार में नेतृत्व बैठक आयोजित की। इस बैठक का फायदा धनंजय मुंडे ने विपक्ष पर हमला करने के लिए किया। एनसीपी नेता और पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे ने विपक्ष को कुछ पंक्तियों द्वारा करारा जवाब दिया। धनंजय मुंडे ने कहा, “तुम्हारी सोच के सांचे में ढल नहीं सकता, जुबान काट दो लहजा बदल नहीं सकता, अरे मुझे भी मोम का पुतला समझ रहे हो क्या, तुम्हारी लौ से ये लोहा पिघल नहीं सकता।”
बीड में एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे की मौजूदगी में एक संकल्प रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में धनंजय मुंडे ने विपक्ष पर निशाना साधा। धनंजय मुंडे ने कहा कि मैंने तटकरे साहब से अनुरोध किया था कि मैं आज भाषण नहीं दूंगा। मैंने कारण नहीं बताया लेकिन मुझे आपके सामने कारण बताना होगा। मेरे मन में सवाल था कि यहां बोलूं या मैदान में।
सुनील तटकरे से किया वादा
धनंजय मुंडे ने कहा कि इसलिए आज हम सब आपसे माफी मांगते हैं और जानते हैं कि हम किस काम के लिए यहां आए हैं। हम यह भी जानते हैं कि हम आज तक यही करते आ रहे हैं। वह आज अपने संगठन के माध्यम से महाराष्ट्र को बीड का अनूठा इतिहास दिखाने की उम्मीद लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि वह तटकरे साहब से वादा करते हैं कि हम बीड जिले के प्रति राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की उम्मीदों पर जरूर खरा उतरेंगे।
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मेरी धरती को बदनाम क्यों किया? – मुंडे
धनंजय मुंडे ने आगे कहा कि मैं बहुत दिनों बाद बोल रहा हूं। मैंने न बोलने का दोहरा शतक पूरा कर लिया है। मैंने बिना बोले 200 दिन बिताए हैं। इन दो सौ दिनों में जो कुछ हुआ, उसमें एक बात ने मुझे जरूर चोट पहुंचाई है। वह है हमारे बीड जिले को बदनाम करना। जिसने भी यह किया, चाहे वह बीड की धरती से हो या बीड की धरती से बाहर का, मुझे उनसे बस यही कहना है। अगर मुझसे दुश्मनी थी, तो मेरी धरती को बदनाम क्यों? मुझे उनसे बस यही कहना है।
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शेरो शायरी में दिया जवाब
जो लोग बाहर से आए और इस बीच इस जिले को बदनाम किया, एक घटना, एक व्यक्ति, एक जिला, एक धरती, एक निर्वाचन क्षेत्र। मैं उनके खिलाफ चार पंक्तियां कहूंगा। तुम्हारी सोच के सांचे में ढल नहीं सकता, जुबान काट दो लहजा बदल नहीं सकता, अरे मुझे भी मोम का पुतला समझ रहे हो क्या, तुम्हारी लौ से ये लोहा पिघल नहीं सकता, धनंजय मुंडे ने ये शेरो-शायरी लिखकर विपक्ष को जवाब दिया है।
