Manoj Jarange Patil On Mahadev Munde Murder Case (फोटो क्रेडिट-X)
Manoj Jarange Patil: बीड के बहुचर्चित महादेव मुंडे हत्याकांड में मराठा आंदोलन के प्रणेता मनोज जरांगे पाटिल के एक ताजा बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। दो साल पुराने इस जघन्य हत्याकांड की जांच अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जरांगे पाटिल ने दावा किया है कि इस मामले में जल्द ही ऐसे बड़े नाम सामने आने वाले हैं, जिससे पूरा परली और मराठवाड़ा दहल जाएगा।
फिलहाल, इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) को महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परीक्षणों की रिपोर्ट मिल गई है, जो इस रहस्यमयी हत्या की गुत्थी सुलझाने में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
मनोज जरांगे पाटिल ने जालना के अंतरवाली सराटी में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि महादेव मुंडे हत्याकांड की कानूनी प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। एसआईटी ने संदिग्धों और गवाहों के जो नार्को टेस्ट और ब्रेन मैपिंग कराए थे, उनकी रिपोर्ट अब प्राप्त हो चुकी है। जरांगे ने संकेत दिया कि इन रिपोर्टों में कुछ प्रभावशाली हस्तियों के संलिप्त होने के प्रमाण मिले हैं। उन्होंने कहा, “मैं अभी उन नामों का खुलासा नहीं करूँगा ताकि जांच में बाधा न आए, लेकिन जब ये नाम सार्वजनिक होंगे, तो परली की राजनीति पूरी तरह हिल जाएगी।”
महादेव मुंडे की हत्या को दो साल बीत चुके हैं, लेकिन तकनीकी सबूतों के अभाव में अब तक कोई बड़ी गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। IPS पंकज कुमावत के नेतृत्व वाली एसआईटी ने इस केस को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों का सहारा लिया है। जांच के दौरान अब तक 200 लोगों से प्रत्यक्ष पूछताछ की जा चुकी है और 150 संदिग्धों के कॉल डिटेल्स खंगाले गए हैं। इतना ही नहीं, लगभग 1500 से अधिक लोगों की सूचनाओं का गहन विश्लेषण किया गया है। 12 गवाहों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण (Psychological Test) भी पूरा हो चुका है, जिससे हत्या की कड़ियां जुड़ने लगी हैं।
इस हत्याकांड का मुख्य संदिग्ध आरोपी गोट्या गीते अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस ने उसके खिलाफ ‘मकोका’ (MCOCA) के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की है। जरांगे पाटिल ने विश्वास जताया है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे स्वयं इस मामले में रुचि ले रहे हैं, इसलिए दोषियों का बचना नामुमकिन है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जरांगे पाटिल का ‘बड़े नामों’ वाला इशारा परली के उन सफेदपोश नेताओं की तरफ हो सकता है, जिनके संबंध फरार आरोपियों से रहे हैं। जैसे ही गोट्या गीते की गिरफ्तारी होगी, इस साजिश का असली चेहरा सामने आ जाएगा।