मटन के दीवाने बाल ठाकरे ने क्यों अचानक छोड़ दिया नॉनवेज? वजह जानकर चौंक जाएंगे
Balasaheb Thackeray: शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को नॉनवेज बेहद पसंद था, लेकिन उनके जीवन में एक ऐसा मोड़ आया कि वे अचानक शाकाहारी हो गए। यह फैसला उन्होंने जीवन के अंतिम समय तक पूरी निष्ठा से निभाया।
- Written By: अपूर्वा नायक
बालासाहेब ठाकरे (सौ. सोशल मीडिया )
Balasaheb Thackeray Birth Anniversay Special News: हिन्दु हृदय सम्राट के तौर पर पूरे भारत में अपनी पहचान बनाने वाले शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की 23 जनवरी को 100वीं जयंती मनायी जाने वाली है।
महाराष्ट्र के प्रमुख नेताओं में से एक बालासाहेब ठाकरे का जन्म 23 जनवरी 1926 को पुणे में हुआ था। वे महाराष्ट्र में अहम राजनीतिक पार्टी शिवसेना के संस्थापक थे।
साथ ही उनकी पहचान एक कार्टूनिस्ट, पत्रकार और हिंदुत्व के समर्थक के रूप में की जाती है, जिन्होंने मराठी पहचान और महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
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पुणे में फैमिली फ्रेंड के घर ठहरते थे
बालासाहेब ठाकरे के निधन के बाद फैमिली फ्रेंड अगस्ती कानितकर ने एक इंटरव्यू में उनसे जुड़ा एक रोचक किस्सा साझा किया था। जिसमें उन्होंने बताया कि राजनीति में सक्रिय होने से पहले जब भी बाल ठाकरे पुणे आते थे, तो अपनी पत्नी के साथ उनके फ्लैट में ही ठहरते थे। उस दौरान वे नियमित रूप से नॉनवेज भोजन करते थे।
नॉनवेज इतना पसंद होने के बाद कैसे बने शाकाहारी?
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को नॉनवेज भोजन का खासा शौक था। खासतौर पर मटन उनके पसंदीदा व्यंजनों में शामिल था। उनके करीबी बताते हैं कि खाने के मामले में बाला साहेब काफी स्पष्ट थे और नॉनवेज को लेकर कभी कोई संकोच नहीं रखते थे। अगस्ती कानितकर ने बताया कि मुंबई में आयोजित एक जैन धर्म से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने के बाद बाल ठाकरे के जीवन में बड़ा बदलाव आया। उस कार्यक्रम से प्रभावित होकर उन्होंने अचानक से पूरी तरह शाकाहारी बनने का निर्णय लिया।
बिना किसी दबाव के लिया ये फैसला
कानितकर ने बताया कि ये फैसला न तो किसी राजनीतिक दबाव में लिया गया था और न ही स्वास्थ्य कारणों से। यह पूरी तरह उनका निजी और आत्मिक निर्णय था। खास बात यह रही कि उन्होंने यह बदलाव केवल कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि आजीवन निभाया।
अंतिम समय तक निभाया संकल्प
बाल ठाकरे ने शाकाहारी बनने के अपने निर्णय को आखिरी सांस तक पूरी निष्ठा से निभाया। उन्होंने खुद भी एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि वे पहले नॉनवेज के शौकीन थे, लेकिन बाद में उन्होंने खुद अपनी ही इच्छा से इसे छोड़ दिया।
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निजी जीवन के अनसुने पहलू
राजनीति में आक्रामक तेवर और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले बाल ठाकरे का यह पक्ष उनके अनुशासन और आत्मसंयम को भी दर्शाता है। यह किस्सा उनके जीवन के उन निजी पहलुओं में से एक है, जो आमतौर पर सार्वजनिक चर्चा में कम आते हैं।
