फ्रीज होगा 'धनुष-बाण'! बालासाहेब ठाकरे जयंती पर होगी निर्णायक सुनवाई, क्या बदलेगा शिवसेना का भविष्य?

Shiv Sena Dispute: शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अंतिम सुनवाई एक बार फिर टल गई है। अब 23 जनवरी को इस मामले पर फैसला आने की उम्मीद है।
Shiv Sena symbol dhanush baan case Supreme Court hearing on 23 January 2026
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Published on
Updated on

Shiv Sena Symbol Case: महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा कानूनी संघर्ष एक बार फिर तारीखों के फेर में फंस गया है। शिवसेना के नाम और 'धनुष-बाण' चिह्न को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अब 23 जनवरी तक टल गई है, जिससे उद्धव ठाकरे गुट को एक और बड़ा झटका लगा है।

महाराष्ट्र में शिवसेना के नाम और उसके आधिकारिक चुनाव चिह्न 'धनुष-बाण' को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई एक बार फिर आगे बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट में 21 जनवरी को होने वाली इस महत्वपूर्ण और अंतिम सुनवाई को अदालत ने अब 23 जनवरी के लिए निर्धारित किया है।

गौरतलब है कि यह मामला पिछले साढ़े तीन साल से लंबित है और राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है। इस ताजा स्थगन से उद्धव ठाकरे गुट को निराशा हाथ लगी है, क्योंकि वे निकाय चुनाव के बाद इस फैसले से काफी उम्मीदें लगाए बैठे थे।

क्यों टली सुनवाई और क्या है नया शेड्यूल?

अदालत की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही यह स्पष्ट होने लगा था कि सुनवाई में देरी हो सकती है। आधिकारिक तौर पर, सॉलिसिटर जनरल ने एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में अपनी उपस्थिति आवश्यक होने का हवाला दिया। इसके बाद, अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों की सहमति से सुनवाई शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए टालने का निर्णय लिया। पिछले अदालती निर्देशों के अनुसार, इस सुनवाई में दोनों पक्षों को अपनी दलीलें पेश करने के लिए लगभग पांच घंटे का समय आवंटित किया गया था, जिसके बाद फैसला आने की प्रबल संभावना थी। अब 23 जनवरी को सुबह 11 बजे से इस पर अंतिम बहस शुरू होगी। विशेष रूप से, यह तारीख शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जयंती के साथ मेल खाती है।

असीम सरोदे की चौंकाने वाली भविष्यवाणी

कानूनी विशेषज्ञ और वकील असीम सरोदे ने इस पूरे मामले पर एक गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उनका मानना है कि इस विवाद का फैसला महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा। सरोदे ने भविष्यवाणी की है कि सुप्रीम कोर्ट 'धनुष-बाण' के चिह्न को फ्रीज करने का आदेश दे सकता है या फिर इसे उद्धव ठाकरे गुट को वापस सौंपा जा सकता है।

हालांकि, उन्होंने राहत की बात यह भी कही कि इस फैसले का असर उन जनप्रतिनिधियों पर नहीं पड़ेगा जो वर्तमान में इस चिह्न पर चुनकर आए हैं। चाहे वे सांसद हों, विधायक हों या हाल ही में संपन्न हुए महानगरपालिका चुनावों के नगरसेवक, उनकी सदस्यता पर इस कानूनी निर्णय का कोई तत्काल प्रभाव नहीं होगा।

नगर निकायों और राजनीतिक भविष्य पर असर

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनावी नतीजों के बाद सत्ता के समीकरणों को देखते हुए यह फैसला अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। सरोदे ने चेतावनी दी है कि जिस प्रकार से राजनीतिक दलों को तोड़ने की प्रक्रिया चल रही है, वह भविष्य में किसी भी दल के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती है, इसलिए इस मामले में कानूनी स्पष्टता आना बहुत जरूरी है। फिलहाल, पूरे राज्य की नजरें अब शुक्रवार की सुबह पर टिकी हैं, जब देश की सबसे बड़ी अदालत इस ऐतिहासिक विवाद पर अपना रुख साफ करेगी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com