सिडको जमीन विवाद: संभाजीनगर में खुली जमीनों का निजीकरण? शिवसेना ने उठाया मुद्दा; महापौर से कार्रवाई की मांग

CIDCO Land Issue: सिडको क्षेत्र की खुली जमीनों, मैदानों और हरित पट्टियों पर हो रहे अवैध निर्माण को रोकने की मांग को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने महापौर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
CIDCO Land Dispute: Privatization of Open Plots in Sambhajinagar? Shiv Sena Raises the Issue; Demands Action from the Mayor
Chhatrapati Sambhajinagar Illegal Construction ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Published on
Updated on

Chhatrapati Sambhajinagar Illegal Construction: छत्रपति संभाजीनगर सिडको क्षेत्र की नियोजित खुली जमीनों, मैदानों और हरित पट्टियों पर हो रहे अवैध निर्माण और निजीकरण को तत्काल रोकने की मांग को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को महापौर समीर राजूरकर को ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि सिडको और मनपा के बीच हुए समझौते का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। शुक्रवार को शिवसेना के शहर प्रमुख डॉ. बालासाहेब थोरात और गटनेता गणेश लोखंडे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने महापौर समीर राजूरकर से मुलाकात कर यह मांग रखी।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सिडको कॉलोनी के एन-1 से एन-13 तक के क्षेत्रों में नियोजित खुली जमीनों, मैदानों और हरित पट्टियों पर अवैध निर्माण और निजीकरण की प्रक्रिया चल रही है, जो सार्वजनिक हित के खिलाफ है।

इन जमीनों का संरक्षण करना मनपा प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन वर्तमान में इस दिशा में लापरवाही दिखाई दे रही है। इस संबंध में सिडको के मुख्य प्रशासक को भी ज्ञापन दिया गया था।

विकास कार्य करने सिडको की अनुमति लेना होगी जरूरी

ज्ञापन में कहा गया है कि सिडको क्षेत्र के एन-9, एम-2, एन-10, एन-7 और एन-11 क्षेत्रों में मैदान के लिए आरक्षित जमीनों पर निर्माण की योजना बनाई जा रही है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। शासन के निर्णय के अनुसार सिडको द्वारा विकसित भौतिक और सामाजिक सुविधाओं का रखरखाव और प्रबंधन एक अप्रैल 2006 के समझौते के तहत मनपा को सौंपा गया है।

निजीकरण हो बंद

समझौते की शर्तों के अनुसार आरक्षित जमीन का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है, जिसके लिए वह निर्धारित है। यदि किसी प्रकार का विकास कार्य करना हो तो सिडको की अनुमति लेना अनिवार्य है।

शिवसेना (उबाठा) ने मांग की कि सिडको की मूल योजना के अनुसार सभी खुली जमीनों और मैदानों का व्यावसायीकरण और निजीकरण तुरंत बंद किया जाए। इन स्थानी पर प्रस्तावित सभी निर्माण कार्य स्थगित किए जाए और इन जमीनों को केवल सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित घोषित किया जाए।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com