Sambhajinagar Commercial Property Seal( Source: Social Media )
Sambhajinagar Commercial Property Seal: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका ने गत वित्त वर्ष में बकाया कर वसूली को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए शहर में बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। लंबे समय से कर नहीं भरने वाले संपत्ति धारकों के प्रतिष्ठान सील करने के साथ ही जब्ती की कार्रवाई भी शुरू की थी।
मार्च महीने के तीन सप्ताह में 8 करोड़, 36 लाख रुपए के बकाया के चलते शहर की 79 व्यावसायिक संपत्तियों को सील ठोकी गई। महानगरपालिका के अनुसार, शहर में बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक हैं, जिन्होंने कई वर्षों से संपत्ति कर का भुगतान नहीं किया है। इससे मनपा के राजस्व पर बड़ा असर पड़ रहा है व विकास कार्यों के लिए आवश्यक निधि भी प्रभावित हो रही है।
इसके चलते प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए बकायेदारों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया है। अपनी आय बढ़ाने की कवायद में महानगरपालिका 4 मार्च से कार्रवाई शुरू की है। इसके तहत 27 मार्च तक शहर में 79 बकायेदारों की संपत्तियों में सील ठोक दी।
प्रशासक काल में कर चुकाने में संपत्तिधारक अनदेखी कर रहे थे। इसे देखते हुए पूर्व मनपा आयुक्त जी. श्रीकांत, अतिरिक्त आयुक्त कल्पिता पिंपले के मार्गदर्शन में उपायुक्त विकास नवाले ने कर वसूली के लिए कड़े कदम उठाए।
मनपा के आम चुनाव के बाद सभागार में नगरसेवक व पदाधिकारी आने से बकाया संपत्ति धारक हरकतों से बाज नहीं आ रहे थे। बावजूद इसके महानगरपालिका प्रशासन किसी के दबाव नहीं आया व संपत्तियां सील करने का कार्य जारी रखा। विशेष बात यह है कि शहर के सभी 1 से 10 जोन कार्यालयों के अंतर्गत बकायेदारों की संपत्तियों को सील व जब्त करने का सिलसिला जारी रहा।
जिन संपत्ति धारकों ने कर का भुगतान किया है उन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लगी सील हमने निकाली है। जो संपत्तिधारक कर का भुगतान नहीं करेंगे, उन पर सील बनी रहेगी। वेदांत नगर क्षेत्र में एक संपत्ति धारक के बगैर अनुमति सील निकालने से उसके खिलाफ पुलिस थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है।
महानगरपालिका के सख्त रवैये को देखते हुए कई संपत्ति धारकों ने कर चुकाने प्राथमिकता दी। इसके अलावा, मनपा ने जब्त संपत्ति की सील निकालने के मामले में एक संपत्ति धारक के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई है।
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बता दें कि मनपा ने बड़े बकायादारों की सूची बनाने के बाद उसके आधार पर संबंधितों को नोटिस भी जारी किए थे, बावजूद इसके संपत्ति धारकों के टस से मस नहीं होने और कोई प्रतिक्रिया नहीं देने पर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई का निर्णय लिया गया, यही कारण है कि 4 मार्च से कार्रवाई शुरू करने के बाद 79 दुकानों को सील ठोकी गई है।