Sambhajinagar Contract Staff Crisis( Source: Social Media )
Sambhajinagar Contract Staff Crisis: छत्रपति संभाजीनगर मनपा की कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है, चार एजेंसियों में से एक एजेंसी ने आर्थिक कारण बताते हुए काम छोड़ने का निर्णय लिया है।
इसके चलते निगम प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है व संबंधित कर्मचारियों को अन्य एजेंसियों में समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
मनपा ने कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की आपूर्ति के लिए चार एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी थी। प्रत्त्येक एजेंसी को लगभग 500 कर्मचारियों का काम दिया गया था। 21 फरवरी से काम शुरू हुआ था, लेकिन एक महीने के भीतर ही एक एजेंसी ने ‘काम घाटे का है’ बताते हुए पीछे हटने का फैसला लिया।
इससे पहले महाराणा एजेंसी के पास करीब 2000 कर्मचारी थे। बिल भुगतान में गड़बड़ी सामने आने के बाद उस एजेंसी का काम बंद कर दिया गया था। शुरुआती जांच में 22 करोड़ रुपये की अनियमितता बताई गई थी, जो बाद में 19 करोड़ रुपये निकली, इसके बाद निगम ने एकाधिकार खत्म कर चार एजेंसियों को काम बांटा था।
नई व्यवस्था के तहत एजेंसियों को पहले तीन महीने का वेतन खुद देना होता है, उसके बाद ही निगम भुगतान करता है। साथ ही 3.84 प्रतिशत सेवा शुल्क भी तय किया गया है।
बढ़ते खर्च के कारण एक एजेंसी के हटने से बाकी तीन एजेंसियों पर अतिरिक्त भार बढ़ गया है प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों की नौकरी पर असर नहीं पड़ेगा, सभी कर्मचारियों को अन्य एजेंसियों में समायोजित किया जाएगा, ताकि कामकाज प्रभावित न हो।
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मनपा ने अनुबंध के आधार पर कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए नियुक्त किए चार एजेंसियों में सीआईएसबी प्रालि (413 कर्मचारी), ओम साई मैनपावर सर्विसेज (297 कर्मचारी), मेडिएटर्स एंड अजंता सेक्युरिटीज (508 कर्मचारी) व सिंघ इंटेलिजन्स सेक्युरिटी (611 कर्मचारी) शामिल हैं। इन एजेंसियों के बीच कुल कार्यबल के आवंटन के बाद कार्य संचालन शुरू हो गया था।