बॉम्बे हाईकोर्ट ने छत्रपति संभाजीनगर मनपा आयुक्त को थमाया नोटिस, आश्वासन के बाद भी अवैध निर्माण तोड़ने का आरोप
Bombay High Court: हाईकोर्ट में 7 दिन तक कार्रवाई न करने का आश्वासन देने के बावजूद संपत्ति तोड़ने पर औरंगाबाद खंडपीठ ने छत्रपति संभाजीनगर मनपा आयुक्त और अतिक्रमण अधिकारी को नोटिस जारी किया है।
- Written By: अंकिता पटेल
औरंगाबाद खंडपीठ (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Bombay High Court Municipality Commissioner: अवैध निर्माण पर सात दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं करने का बॉम्बे हाईकोर्ट में दिया गया मौखिक आश्वासन तोड़ने के मामले में औरंगाबाद खंडपीठ ने छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका आयुक्त अमोल येडगे और अतिक्रमण हटाओ विभाग के अधिकारी संतोष वाहुले को नोटिस जारी किया है। दोनों को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
तीन संपत्तियों के लिए मांगा 1.5 करोड़ मुआवजा
न्यायमूर्ति नितीन सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति आबासाहेब शिंदे की खंडपीठ ने शुक्रवार को नगरसेवक मतीन पटेल, हनीफ खान और सैय्यद सरवर की ओर से दायर दीवानी आवेदन स्वीकार करते हुए आयुक्त और संबंधित अधिकारी को नामजद प्रतिवादी बनाने की अनुमति दी।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि न्यायालय में दिए गए आश्वासन का उल्लंघन करते हुए उनकी तीन संपत्तियां ध्वस्त कर दी गईं। इसके लिए प्रत्येक संपत्ति पर 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की गई है।
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मनपा पर अवमानना का आरोप, सुबह 5 बजे तोड़ दी गईं संपत्तियां
याचिका के अनुसार, महानगरपालिका ने 9 मई 2026 को नारेगांव स्थित कथित अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी कर तीन दिनों में जवाब मांगा था। समय बढ़ाने का अनुरोध अस्वीकार होने पर याचिकाकर्ताओं ने अवकाशकालीन न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
12 मई की सुनवाई के दौरान मनपा ने 24 घंटे में निर्माण हटाने का दूसरा नोटिस जारी किया, जिस पर अदालत में यह मौखिक आश्वासन दिया गया कि सात दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस आश्वासन के बावजूद 13 मई की सुबह लगभग पांच बजे उनकी तीनों संपत्तियां तोड़ दी गईं। इसके बाद अधिवक्ता अभय सिंह भोसले और कृष्णा रोडगे के माध्यम से दीवानी आवेदन दाखिल कर न केवल मुआवजे की मांग की गई, बल्कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश देने की भी अदालत से प्रार्थना की गई है।
