Bombay High Court Jalna-Jalgaon Railway Project (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar Jalna-Jalgaon Railway Project News: छत्रपति संभाजीनगर अधिसूचना में अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन का स्पष्ट विवरण नहीं होने का दावा करते हुए जालना-जलगांव रेलवे परियोजना के विरोध में दायर रिट याचिका पर मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट औरंगाबाद खंडपीठ में सुनवाई हुई।
न्यायमूर्ति विभा कंकणवाड़ी व न्यायमूर्ति हितेन वेणेगांवकर की खंडपीठ ने केंद्र व राज्य सरकार सहित संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 23 मार्च तक हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, प्रकरण की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी।
यह याचिका जालना-जलगांव रेलवे परियोजना विरोधी समिति के सचिव रवींद्र काकड़े, परियोजना प्रभावित कृष्णा लहाणे व संजय काकड़े की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अधिसूचना में गांववार जानकारी, प्रभावित भूखंडों की पहचान व मालिकों के विवरण के अभाव है। इसके चलते प्रभावित लोगों को यह समझ नहीं आ रहा कि कौन-सी जमीन अधिग्रहीत की जाएगी। यही नहीं, सुनवाई के दौरान प्रस्तावित रेलवे मार्ग की अलाइनमेंट पर भी गंभीर आपत्तियां उठाई गई।
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आरोप है कि मार्ग सिल्लोड़ तहसील के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र से गुजरता है। साथ ही, सिल्लोड़ शहर की रिहायशी सीमा से रेलवे लाइन ले जाने के निर्णय को त्रुटिपूर्ण बताया गया। याचिका में कहा गया है कि वैकल्पिक मार्गों का समुचित अध्ययन किए बिना अलाइनमेंट तय की गई। सवाल उठाया गया कि मराठवाड़ा के प्रमुख प्रशासनिक, औद्योगिक व शैक्षणिक केंद्र छत्रपति संभाजीनगर को परियोजना से जोड़ने के विकल्प पर विचार क्यों नहीं किया गया?
याचिकाकर्ताओं की ओर से एड. आशीष सोनवणे व विलास सोनवणे ने पक्ष रखा। एड. संध्या कवड़े ने सहयोग किया। सुनवाई के दौरान विश्व धरोहर स्थल अजंता गुफाओं की सुरक्षा को लेकर खंडपीठ ने गंभीर चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने पूछा कि प्रस्तावित रेलवे मार्ग से इस पुरातात्विक धरोहर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है या नहीं, इस बाबत स्पष्ट स्थिति पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।